कुंडली में 8 प्रकार की होती हैं योगिनी दशाएं, हमारे जीवन को करती हैं प्रभावित, देती हैं शुभ-अशुभ फल

Published : Jun 10, 2021, 09:18 AM ISTUpdated : Jun 10, 2021, 10:20 AM IST
कुंडली में 8 प्रकार की होती हैं योगिनी दशाएं, हमारे जीवन को करती हैं प्रभावित, देती हैं शुभ-अशुभ फल

सार

ज्योतिष में जिस तरह 120 वर्ष की विंशोत्तरी दशा होती है, उसी तरह 36 वर्ष की योगिनी दशा भी मानी गई है। विंशोत्तरी दशा की तरह ही योगिनी दशाएं भी मनुष्य के जीवन को प्रभावित करती हैं।

उज्जैन. अष्ट योगिनी दशा को भी 27 नक्षत्रों के आधार पर बांटा गया है जो अपने समयकाल में व्यक्ति को उसके कर्मानुसार सुख-दुख प्रदान करती है। इनकी समयावधि क्रमश: 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8 वर्ष होती है। इन सबका कुल योग 36 वर्ष होता है। अर्थात् पहली मंगला दशा 1 वर्ष, दूसरी 2 वर्ष इसी तरह आठवीं संकटा दशा 8 वर्ष की होती है। ये होती हैं अष्ट योगिनी दशाएं…

मंगला
योगिनी दशा की पहली दशा है मंगला। यह एक वर्ष की होती है। इसके स्वामी चंद्र हैं। जिन लोगों का जन्म आर्द्रा, चित्रा, श्रवण नक्षत्र में होता है, उन्हें मंगला दशा होती है। यह दशा अच्छी मानी जाती है। मंगला योगिनी की कृपा जिस जातक पर हो जाती है उसे हर प्रकार के सुख-संपन्नता प्राप्त होती है। उसके संपूर्ण जीवन में मंगल ही मंगल होता है।

पिंगला
क्रमानुसार दूसरी योगिनी दशा पिंगला होती है। यह दो वर्ष की होती है। इसके स्वामी सूर्य हैं। जिनका जन्म पुनर्वसु, स्वाति, धनिष्ठा नक्षत्र में होता है उन्हें पिंगला दशा होती है। यह दशा भी शुभ होती है। पिंगला दशा में जीवन के सारे संकट शांत हो जाते हैं। उसकी उन्नति होती है और सुख-संपत्ति प्राप्त होती है।

धान्या
तीसरी योगिनी दशा धान्या होती है और यह तीन वर्ष की होती है। इसके स्वामी बृहस्पति हैं। जिनका जन्म पुष्य, विशाखा, शतभिषा नक्षत्र में होता है उन्हें धान्या दशा से जीवन प्रारंभ होता है। यह दशा जिनके जीवन में आती है उन्हें अपार धन-धान्य प्राप्त होता है।

भ्रामरी
चौथी योगिनी दशा भ्रामरी होती है और यह चार वर्ष की होती है। इसके स्वामी मंगल हैं। जिनका जन्म अश्विनी, अश्लेषा, अनुराधा, पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में होता है उनकी जन्मकालिक योगिनी दशा भ्रामरी होती है। इस दशा के दौरान व्यक्ति क्रोधी हो जाता है। कई प्रकार के संकट आने लगते हैं। आर्थिक और संपत्ति का नुकसान होता है। व्यक्ति भ्रमित हो जाता है।

भद्रिका
पांचवीं योगिनी दशा भद्रिका होती है और यह पांच वर्ष की होती है। इसके स्वामी बुध हैं। जिनका जन्म भरणी, मघा, ज्येष्ठा, उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में होता है उनकी जन्मकालिक योगिनी दशा भद्रिका होती है। इस दशाकाल में व्यक्ति के सुकर्मो का शुभ फल प्राप्त होता है। शत्रुओं का नाश होता है और जीवन के व्यवधान समाप्त हो जाते हैं।

उल्का
छटी योगिनी दशा उल्का होती है और यह छह वर्ष की होती है। इसके स्वामी शनि हैं। जिनका जन्म कृतिका, पूर्वा फाल्गुनी, मूल, रेवती नक्षत्र में होता है उनकी जन्मकालिक योगिनी दशा उल्का होती है। इस दशाकाल में व्यक्ति को मेहनत अधिक करनी पड़ती है। जीवन में दौड़भाग बनी रहती है। कार्यो में शिथिलता आ जाती है। कई तरह के संकट आते हैं।

सिद्धा
सातवीं योगिनी दशा सिद्ध होती है औ इसके स्वामी शुक्र हैं। जिनका जन्म रोहिणी, उत्तराफाल्गुनी, पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में होता है उनकी जन्मकालिक योगिनी दशा सिद्धा होती है। इस दशा के भोग काल में व्यक्ति की संपत्ति, भौतिक सुख, प्रेम, आकर्षण प्रभाव आदि में वृद्धि होती है। जिन लोगों पर सिद्धा योगिनी की कृपा होती है उनके जीवन में कोई अभाव नहीं रह जाता है।

संकटा
योगिनी दशा चक्र की आठवीं और अंतिम दशा संकटा होती है और इसके स्वामी राहू हैं। जिनका जन्म मृगशिर, हस्त, उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में होता है उनकी जन्मकालिक दशा संकटा होती है। संकटा योगिनी दशाकाल में व्यक्ति हर ओर से परेशानियों और संकटों से घिर जाता है। संकटों के नाश के लिए इस दशा के भोगकाल में मातृरूप में योगिनी की पूजा करें।
 

PREV

Aaj Ka Rashifal, ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति और आज का दिन आपके लिए कैसा रहेगा—यहां सबसे सटीक जानकारी पढ़ें। इसके साथ ही विस्तृत Rashifal in Hindi में जीवन, करियर, स्वास्थ्य, धन और रिश्तों से जुड़े रोज़ाना के ज्योतिषीय सुझाव पाएं। भविष्य को बेहतर समझने के लिए Tarot Card Reading के insights और जीवन पथ, भाग्यांक एवं व्यक्तित्व को समझने हेतु Numerology in Hindi गाइड भी पढ़ें। सही दिशा और सकारात्मक मार्गदर्शन के लिए भरोसा करें — Asianet News Hindi पर उपलब्ध विशेषज्ञ ज्योतिष कंटेंट पर।

Recommended Stories

12 जनवरी का राशिफल, शुक्र के राशि बदलने से 4 राशियों की चमकेगी किस्मत
Weekly Tarot Horoscope: इस सप्ताह 5 राशि वालों को मिलेगी गुड न्यूज