Adra Kheer Recipe: आद्रा नक्षत्र के अवसर पर कई घरों में दाल भरी पूरी और खीर बनाने की परंपरा निभाई जाती है। यह केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि मौसम के अनुसार पौष्टिक भोजन करने की भारतीय परंपरा भी है। जानिए दाल भरी पूरी-खीर बनाने का आसान तरीका।
बरसात की शुरुआत के साथ आने वाला आद्रा नक्षत्र भारतीय परंपराओं में खास महत्व रखता है। खासकर उत्तर भारत के कई राज्यों में आद्रा के दिन दाल भरी पूरी और खीर बनाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। मान्यता है कि इस दिन सात्विक और पौष्टिक भोजन करने से पूरे मौसम में स्वास्थ्य अच्छा रहता है। यह परंपरा केवल धार्मिक आस्था से नहीं, बल्कि मौसम के अनुसार शरीर को ऊर्जा देने वाली भारतीय खानपान संस्कृति से भी जुड़ी हुई है। आइए जानते हैं कि आद्रा पर यह विशेष भोजन क्यों बनाया जाता है और इसे घर पर आसानी से कैसे तैयार किया जा सकता है।
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आद्रा पर दाल भरी पूरी-खीर बनाने की परंपरा
आद्रा नक्षत्र को वर्षा ऋतु की शुरुआत का संकेत माना जाता है। पुराने समय में किसान इस दिन अच्छी बारिश और भरपूर फसल की कामना करते थे। इसी अवसर पर घरों में दाल भरी पूरी, खीर और अन्य पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते थे। मान्यता है कि इस दिन परिवार के साथ मिलकर भोजन करने से सुख-समृद्धि बनी रहती है। दाल से मिलने वाला प्रोटीन और दूध-चावल से बनी खीर शरीर को मौसम बदलने के दौरान आवश्यक पोषण भी देती है।
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दाल भरी पूरी बनाने का आसान तरीका
दाल भरी पूरी बनाने के लिए सबसे पहले चना दाल को 2-3 घंटे भिगोकर हल्का उबाल लें। इसके बाद दाल का पानी निकालकर उसमें सौंफ, जीरा, अदरक, हींग, लाल मिर्च, धनिया पाउडर और नमक मिलाकर भून लें। अब गेहूं के आटे की लोई बनाकर उसमें तैयार दाल की स्टफिंग भरें और हल्के हाथों से बेल लें। गर्म तेल में सुनहरा होने तक तलें। बाहर से कुरकुरी और अंदर से मसालेदार दाल वाली पूरी खाने में बेहद स्वादिष्ट लगती है।
खीर बनाने के लिए सबसे पहले दूध को धीमी आंच पर अच्छी तरह उबालें। अब उसमें धुले हुए चावल डालकर लगातार चलाते हुए पकाएं। जब चावल पूरी तरह गल जाएं, तब स्वादानुसार चीनी मिलाएं। इसके बाद इलायची पाउडर, कटे हुए बादाम, काजू और पिस्ता डालें। चाहें तो ऊपर से थोड़े केसर के धागे भी डाल सकते हैं। गाढ़ी और मलाईदार खीर तैयार होने पर इसे गर्म या ठंडा दोनों तरह से परोसा जा सकता है।
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परंपरा के साथ सेहत का भी है खास संबंध
आयुर्वेद के अनुसार मौसम बदलने पर पाचन शक्ति प्रभावित होती है। ऐसे समय में दाल, दूध और चावल जैसे पौष्टिक खाद्य पदार्थ शरीर को ऊर्जा देने के साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी मदद करते हैं। यही कारण है कि आद्रा पर बनने वाली दाल भरी पूरी और खीर केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि भारतीय जीवनशैली और संतुलित खानपान का भी हिस्सा मानी जाती है। आज भी कई परिवार इस परंपरा को पूरे उत्साह के साथ निभाते हैं और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ते हैं।
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