
Dev Diwali Prasad Recipe: देव दिवाली, जिसे “देवताओं की दिवाली” कहा जाता है, जिसे कार्तिक पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है। इस दिन गंगा घाटों पर दीप दान का विशेष महत्व होता है। इसके अलावा इस दिन भगवान विष्णु, शिव और देवी लक्ष्मी की आराधना की जाती है। मान्यता है कि देव दिवाली पर पूजन में भोग का विशेष महत्व होता है। जैसे दिवाली मां लक्ष्मी के स्वागत की होती है, वैसे ही देव दिवाली देवताओं के स्वागत का पर्व है। इस दिन देवताओं को प्रसन्न करना चाहते हैं, तो इन 5 भोग खीर, पूड़ी, सूजी हलवा, चना दाल, और पंचामृत को पूजा में भगवान को अर्पित करना चाहिए। ये पांच भोग विष्णु जी समेत अन्य देवी देवताओं को बहुत प्रिय है, इसलिए इसे जरूर बनाकर अर्पित करें।
देव दिवाली के पूजन में खीर को सबसे पवित्र भोग माना गया है। दूध, चावल और शक्कर से बनी यह खीर शुद्धता और समृद्धि का प्रतीक होती है। इसे बनाने के लिए सबसे पहले दूध को धीमी आंच पर गाढ़ा करें, फिर उसमें भीगे हुए चावल डालें। जब चावल पक जाएं तो उसमें शक्कर और इलायची डालकर खीर को अच्छी तरह से मिलाएं। चाहें तो बादाम-काजू से सजाकर इसे ठंडा या गरम भोग में अर्पित करें। इसके अलावा आप मखाने की खीर भी बनाकर देवताओं को अर्पित कर सकते हैं।
हर पूजा का प्रसाद पूड़ी के बिना अधूरा लगता है। गेहूं के आटे से बनी कुरकुरी पूड़ियां मां लक्ष्मी को खीर के साथ विशेष रूप से अर्पित की जाती हैं। आटे में थोड़ा सा घी डालकर उसे मुलायम गूंधें। छोटी-छोटी पूड़ियां बेलकर गरम तेल में सुनहरी होने तक तलें। पूजा के बाद यही पूड़ी खीर या हलवे के साथ प्रसाद के रूप में बांटकर स्वयं भी ग्रहण करें।
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देव दिवाली के भोग में सूजी का हलवा सादगी का प्रतीक है। इसे बनाने के लिए घी में सूजी को सुनहरा होने तक भूनें, फिर उसमें उबलता हुआ पानी और शक्कर डालें। इलायची पाउडर और मेवे से सजाकर इसे पूजन थाल में रखें। इसका स्वाद हर श्रद्धालु को पसंद आता है और यह आसानी से झटपट बन जाता है।
देव दिवाली के दिन भगवान शिव और विष्णु को चना दाल का भोग भी अर्पित किया जाता है। भीगी हुई दाल को हल्दी और नमक के साथ उबाल लें। फिर उसमें थोड़ा घी और जीरे का तड़का लगाकर भोग तैयार करें। यह प्रसाद सादगी में भक्ति का स्वाद भर देता है और पूजा के बाद प्रसाद के रूप में सभी को वितरित किया जाता है। आप चाहें तो भीगे हुए चना दाल में गुड़ या शक्कर डालकर भी भोग लगा सकते हैं।
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देव दिवाली पूजा में पंचामृत का विशेष स्थान होता है। इसे दूध, दही, शहद, घी और शक्कर से बनाया जाता है। ये पांच तत्व पंचतत्वों का प्रतीक माने जाते हैं। इन्हें एकसाथ मिलाकर भगवान को अर्पित किया जाता है और फिर सभी भक्त इसे प्रसाद रूप में ग्रहण करते हैं।
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