मुस्लिम समुदाय क्यों नहीं खाते सूअर का मांस?

Published : Sep 14, 2024, 02:18 PM IST
मुस्लिम समुदाय क्यों नहीं खाते सूअर का मांस?

सार

मुस्लिम समुदाय के लोग सूअर का मांस नहीं खाते हैं। इसके पीछे धार्मिक कारणों के साथ-साथ कई और भी वजहें हैं। सिर्फ़ मुस्लिम ही नहीं, हिन्दू समेत कुछ अन्य धर्म के लोग भी सूअर का मांस नहीं खाते हैं। जानते हैं क्यों?  

मुस्लिम समुदाय (Muslim community) के लोग सूअर का मांस (pork) का सेवन नहीं करते हैं, यह बात तो लगभग सभी जानते हैं। लेकिन आखिर क्यों सूअर के मांस का सेवन नहीं करते हैं, यह बहुत कम लोगों को पता है। दरअसल, सूअर का मांस इस्लामिक (Islamic) मान्यताओं के अनुसार वर्जित आहार है। इसके पीछे धार्मिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक कारण भी शामिल हैं. 

मुस्लिम समुदाय के लोग सूअर का मांस क्यों नहीं खाते हैं : 

धार्मिक कारण :  मुस्लिम समुदाय के लोग सूअर का मांस इसलिए नहीं खाते हैं क्योंकि इस्लामिक धार्मिक ग्रंथों में ऐसा करने का निर्देश दिया गया है। इस्लाम धर्म के पवित्र ग्रंथ (Islam holy book) कुरान में सूअर के मांस को हराम (निषिद्ध) बताया गया है। कुरान के 2:173, 5:3, 6:145 और 16:115 छंदों में मुसलमानों को सूअर का मांस न खाने के लिए स्पष्ट रूप से कहा गया है। यह धार्मिक नियम मुस्लिमों के जीवन का एक अभिन्न अंग है और वे इसका पूरी श्रद्धा से पालन करते हैं।

 

स्वच्छता और स्वास्थ्य : धार्मिक कारणों के अलावा, सूअर का मांस न खाने का एक और कारण स्वच्छता और स्वास्थ्य भी है। सूअर को आमतौर पर एक गंदा जानवर माना जाता है। सूअर अपने भोजन में कई तरह की चीजें खाता है, जिसमें कचरा और मल भी शामिल है। ऐसे में सूअर के शरीर में परजीवी, बैक्टीरिया और वायरस पनपने का खतरा बना रहता है। कुछ शोधों में यह भी पाया गया है कि सूअर के मांस में कई तरह के बैक्टीरिया और वायरस पाए जाते हैं। ट्राइकिनोसिस नामक बीमारी सूअर के मांस से फैलती है, जो इंसानों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होती है। हालांकि अब सूअर के मांस की स्वच्छता और जांच पर पहले से अधिक ध्यान दिया जाता है, लेकिन इस्लामिक दृष्टिकोण से इसे अभी भी असुरक्षित माना जाता है।

सांस्कृतिक कारण : सूअर के मांस के सेवन पर रोक के पीछे सिर्फ़ धार्मिक ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक कारण भी हैं। मुस्लिम समाज में सूअर को एक अशुद्ध जानवर के रूप में देखा जाता है और उसका सेवन करना अनुशासन और जीवन में धार्मिक आस्था की प्रतिबद्धता को तोड़ने जैसा माना जाता है। मुस्लिम परिवारों में सूअर के मांस के सेवन को बहुत गंभीरता से लिया जाता है। उनका मानना है कि सूअर का मांस न खाना सिर्फ़ व्यक्तिगत आस्था का विषय नहीं है, बल्कि यह समुदाय की एकता और गरिमा से भी जुड़ा है. 

अन्य धर्मों में भी है सूअर का मांस वर्जित : सूअर के मांस का सेवन सिर्फ़ इस्लाम में ही नहीं, बल्कि कुछ अन्य धर्मों में भी वर्जित है। यहूदी धर्म में भी सूअर के मांस पर पाबंदी है। यहूदी धर्मग्रंथ तोराह में सूअर को अशुद्ध माना गया है और उसके सेवन को निषिद्ध बताया गया है।

 

इसी तरह, हिन्दू धर्म (Hinduism) का पालन करने वाले कुछ समुदाय के लोग भी सूअर का मांस नहीं खाते हैं। हालांकि हिन्दू धर्म में सूअर के मांस का सेवन वर्जित नहीं है, लेकिन बहुत से लोग इसे अशुद्ध मानते हैं। सूअर का मांस ज़्यादातर भारतीय व्यंजनों में आम सामग्री नहीं है, लेकिन गोवा, केरल और कर्नाटक जैसे राज्यों में इसका सेवन काफ़ी किया जाता है। इसके अलावा, चीन और म्यांमार की सीमा से लगे पूर्वोत्तर भारत में भी इसका सेवन काफ़ी होता है. 

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