
अगर आपको लगता है कि अंगूर (Grapes) सिर्फ बड़े खेत या गार्डन में ही उग सकते हैं, तो ऐसा बिल्कुल नहीं है। थोड़ी सही देखभाल और सही तरीका अपनाकर आप बालकनी में भी अंगूर का पौधा आसानी से उगा सकती हैं। अच्छी बात यह है कि अंगूर की बेल ज्यादा जगह नहीं लेती और सही सपोर्ट मिलने पर ऊपर की तरफ फैलती है। अगर आप होम गार्डनिंग पसंद करती हैं और घर पर ताजे फल उगाने का मन है, तो अंगूर का पौधा शानदार गार्डनिंग ऑप्शन हो सकता है।
बालकनी में अंगूर उगाने के लिए सबसे पहले छोटी जगह में ग्रो होने वाली वैरायटी चुनना जरूरी है। नर्सरी में मिलने वाली टेबल ग्रेप्स या dwarf variety balcony gardening के लिए बेहतर मानी जाती हैं। अच्छी क्वालिटी का हेल्दी प्लांट लेने से ग्रोथ जल्दी हो सकती है।
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अंगूर की जड़ें फैलती हैं, इसलिए इसे बड़े और गहरे गमले में लगाना बेहतर हो सकता है। कम से कम 16–20 इंच का पॉट चुनें ताकि रूट्स को अच्छी जगह मिल सके। ड्रेनेज बोव वाला पॉट लें, ताकि पानी जमा न हो।
अंगूर का पौधा हल्की और अच्छी ड्रैनेज वाली मिट्टी में बेहतर ग्रो कर सकता है। इसके लिए 40% गार्डन मिट्टी, 30% कंपोस्ट और 20% रेत 10% कोकोपीट चुनें। इस तरह का सॉयल मिक्स रूट्स को हेल्दी रखने में मदद करता है। ध्यान रखें अंगूर की बेल को कम से कम 5–6 घंटे की धूप चाहिए होती है। प्लांट को में ऐसी जगह रखें जहां डायरेक्ट सनलाइट आती हो। कम धूप मिलने पर बेल तो बढ़ सकती है, लेकिन फल कम आते हैं।
अंगूर क्लिबिंग प्लांट होता है, इसलिए इसे जाली, तार या बालकनी रेलिंग से सपोर्ट दें। इससे बेल ऊपर की ओर बढ़ती है और बालकली भी काफी सुंदर दिख सकती है। हर 20–25 दिन में ऑर्गेनिक कंपोस्ट या वार्मीकंपोस्ट डाल सकती हैं।
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बहुत कम लोग जानते हैं कि केले के छिलके अंगूर की बेल के लिए शानदार फर्टिलाइजर का काम कर सकते हैं। केले के छिलकों को 2–3 दिन पानी में भिगोकर उसका पानी पौधे में डालें। इसमें मौजूद पोटैशियम फ्लोवरिंग और फ्रूटिंग को सपोर्ट कर सकता है, जिससे अंगूर मीठे और हेल्दी आ सकते हैं।
फल आने के समय एक इंट्रेस्टिंग ट्रिक अपनाई जाती है। जब छोटे-छोटे अंगूर दिखने लगें, तब रोज ज्यादा पानी देने की बजाय हल्का कंट्रोल वॉटरिंग करें। इससे कई बार फल ज्यादा वॉटरी होने की बजाय मीठे बन सकते हैं। (पूरी तरह पानी बंद न करें।)
प्याज के सूखे छिलकों को रातभर पानी में भिगोकर अगली सुबह उसका पानी पौधे में डाल सकती हैं। इससे मिट्टी को natural nutrients मिल सकते हैं और कीड़े भी कुछ हद तक दूर रह सकते हैं। अगर बेल की पत्तियों पर सफेद दाग या कंगल दिखने लगे, तो 1 हिस्सा दूध और 4 हिस्सा पानी मिलाकर हल्का स्प्रे कर सकती हैं।
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