
हेल्थ डेस्क: सफेद दाग वाले व्यक्ति को देखते ही उससे दूर जाना या फिर छुआ-छूत का भाव रखना हमारे समाज में लंबे समय से चला आ रहा है। हाल ही में एक्टर विजय वर्मा ने सफेद दाग होने की बात स्वीकार की। विजय वर्मा ने कहा कि जब वो एक्टर नहीं थो तो उन्हें सफेद दाग को लेकर चिंता होती थी। अब एक्टर इस स्किन कंडीशन नहीं डरते हैं। हमारे समाज में सफेद दाग को लेकर एक नहीं बल्कि बहुत-सी गलत धारणाएं हैं। आईए जानते हैं विटिलिगो कंडीशन से जुड़े कुछ मिथ और उनके फैक्ट के बारे में।
मिथ- सफेद दाग वाले व्यक्ति को छू लेने से विटिलिगो बीमारी फैलती है।
फैक्ट- सफेद दाग की बीमारी कोई संक्रमण नहीं बल्कि आटोइम्यून बीमारी है। जब शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली शरीर को बचाने के बजाय खुद ही सेल्स पर अटैक कर देती है तो कई बीमारियां जन्म लेती हैं। सफेद दाग स्किन के मेलानोसाइट्स खत्म होने पर पैदा होते हैं। मछली-दूध साथ में खाने से भी ये बीमारी नहीं होती है।
मिथ- शरीर के किसी भी हिस्से में होने वाले सफेद पैच विटिलिगो से संबंधित होते हैं।
फैक्ट- कई बार फंगल इन्फेक्शन के कारण स्किन का कलर सफेद हो जाता है। वहीं चोट लगने के बाद भी स्किन सफेद हो सकती है। ऐसी समस्याओं के कुछ समय बाद तक त्वचा का रंग वापस पहले जैसा हो जाता है। इसका विटिलिगो कंडीशन से कोई लेना-देना नहीं है।
मिथ- सफेद दाग के कारण भविष्य में त्वचा कैंसर की संभावना बढ़ जाती है।
फैक्ट -ये बात बिल्कुल भी सच नहीं है। जिन लोगों को विटिलिगो बीमारी होती है उनमें त्वचा कैंसर का खतरा हो, ऐसा बिल्कुल भी जरूरी नहीं है। इस संबंधन में अब तक कोई भी साइंटिफिक प्रूफ नहीं मिला है।
मिथ- सफेद दाग की बीमारी अपने आप ही ठीक हो जाती है।
फैक्ट- किसी भी व्यक्ति को अगर विटिलिगो हो जाता है तो उसकी बीमारी या तो स्टेबल रहती है या फिर कुछ समय बाद बढ़ जाती है। बीमारी का अब तक स्थायी इलाज नहीं है। डॉक्टर बीमारी की कंट्रोल करने की कोशिश करते हैं।
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