
आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में पेट से जुड़ी परेशानियां लगभग हर घर में देखने को मिलती हैं। किसी को सुबह पेट साफ नहीं होता, किसी को खाने के बाद गैस और जलन होती है, तो कोई बिना वजह थकान महसूस करता रहता है। ज़्यादातर लोग इन्हें मामूली समस्या मानकर दवा ले लेते हैं, लेकिन कुछ समय बाद वही दिक्कत दोबारा सामने आ जाती है। यही वह बिंदु है जहां आयुर्वेद आधुनिक इलाज से अलग रास्ता दिखाता है। आयुर्वेद मानता है कि जब तक पाचन तंत्र संतुलन में नहीं होगा, तब तक कोई भी दवा स्थायी असर नहीं दिखा सकती।
आयुर्वेद के अनुसार शरीर की सेहत किसी एक अंग पर नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम के संतुलन पर निर्भर करती है। इस संतुलन का केंद्र पाचन तंत्र होता है। आयुर्वेद मानता है कि भोजन ही शरीर का पहला इलाज है और वही सही तरीके से पचकर शरीर को ऊर्जा और ताकत देता है। अगर भोजन सही ढंग से नहीं पचता, तो वही आगे चलकर बीमारी का कारण बनता है। इसलिए आयुर्वेद में पेट को शरीर की नींव कहा गया है।
आयुर्वेद में पाचन शक्ति को अग्नि कहा जाता है। यह अग्नि सिर्फ भोजन को पचाने तक सीमित नहीं होती, बल्कि शरीर में पोषक तत्वों के अवशोषण, ऊर्जा निर्माण, रोग प्रतिरोधक क्षमता और ऊतकों की मरम्मत तक में अहम भूमिका निभाती है।
डॉ. अंकिता शर्मा, सीनियर आयुर्वेद फिजिशियन, संतुष्टि होलिस्टिक हेल्थ के अनुसार, जब अग्नि संतुलित होती है तो शरीर खुद को स्वस्थ रखने में सक्षम रहता है। लेकिन जैसे ही अग्नि कमजोर पड़ती है, शरीर में धीरे-धीरे असंतुलन शुरू हो जाता है।
पाचन की समस्या कभी अचानक गंभीर रूप नहीं लेती। इसकी शुरुआत अक्सर गैस, पेट फूलने, खट्टी डकार या कब्ज जैसी शिकायतों से होती है। लोग इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं या अस्थायी राहत की दवा ले लेते हैं। आयुर्वेद के अनुसार, जब भोजन पूरी तरह नहीं पचता, तो शरीर में आम नाम का विषैला तत्व बनने लगता है।
डॉ. शर्मा बताती हैं कि आम शरीर के अंदर सूजन पैदा करता है और पोषण व दवाओं के असर को रोक देता है। यही कारण है कि कई लोग सही खान-पान और इलाज के बावजूद भी पूरी तरह ठीक महसूस नहीं कर पाते।
आधुनिक इलाज में अक्सर लक्षणों पर ध्यान दिया जाता है, जबकि आयुर्वेद बीमारी की जड़ तक पहुंचने की कोशिश करता है। आयुर्वेद मानता है कि अगर पाचन सही हो जाए, तो शरीर खुद को ठीक करने लगता है। ऐसे में दवाएं सहायक भूमिका निभाती हैं, मुख्य आधार नहीं बनतीं। इस प्रक्रिया से इलाज का असर लंबे समय तक रहता है और बीमारी के दोबारा लौटने की संभावना भी कम हो जाती है।
आयुर्वेद के अनुसार आज की जीवनशैली पाचन तंत्र पर सबसे ज्यादा असर डाल रही है। अनियमित समय पर खाना, जल्दी-जल्दी भोजन करना, हर समय कुछ न कुछ खाते रहना, मानसिक तनाव और नींद की कमी, ये सभी आदतें अग्नि को कमजोर कर देती हैं। ऊपर से प्रोसेस्ड और तला-भुना भोजन पाचन पर अतिरिक्त बोझ डालता है, जिससे धीरे-धीरे गट बैलेंस बिगड़ने लगता है।
आयुर्वेद मानता है कि सही दिनचर्या पाचन सुधारने की सबसे बड़ी दवा है। जब व्यक्ति तय समय पर भोजन करता है, ताजा और गर्म खाना खाता है, और खाते समय ध्यान भटकाने वाली चीज़ों से दूर रहता है, तो अग्नि धीरे-धीरे मजबूत होने लगती है। पर्याप्त नींद और तनाव नियंत्रण भी पाचन सुधारने में अहम भूमिका निभाते हैं। डॉ. शर्मा के अनुसार, जब जीवनशैली सुधरती है, तो शरीर अपने आप संतुलन की ओर लौटने लगता है।
जब पाचन तंत्र ठीक हो जाता है, तो शरीर में ऊर्जा बढ़ने लगती है, इम्यूनिटी मजबूत होती है और छोटी-बड़ी समस्याएं अपने आप कम होने लगती हैं। इसी वजह से आयुर्वेद गट हेल्थ को इलाज का आखिरी नहीं, बल्कि पहला कदम मानता है। यह न सिर्फ बीमारी से राहत देता है, बल्कि भविष्य की समस्याओं से भी बचाव करता है।
आज जब हर बीमारी का तुरंत समाधान खोजा जा रहा है, आयुर्वेद हमें एक सरल लेकिन गहरी बात याद दिलाता है, असली और स्थायी सेहत की शुरुआत पेट से होती है।