
हेल्थ डेस्क: मां बनना हर स्त्री के जीवन का सबसे अहम पड़ाव होता है। इसे स्त्री का दूसरा जन्म भी कहते हैं इसी के साथ-साथ एक पुरुष के लिए भी पिता बनना बहुत कठिन होता है। पिता बनते ही पुरुष पर कई तरह की जिम्मेदारियां आ जाती हैं। कहते हैं कि पुरुष कभी बूढ़ा नहीं होता, क्योंकि उसकी बॉडी क्लॉक के साथ पॉज नाम का शब्द कभी नहीं जुड़ता। जबकि महिलाएं में मेनोपॉज एक उम्र के बाद आ जाता है जो कि उनकी मां बनने की क्षमता पर असर डालता है। इसीलिए महिलाओं पर जल्दी मां बनने का प्रेशर होता है लेकिन पुरुष पर समय से पिता बनने का ऐसा कोई दबाव नहीं होता। जबकि सच ये है कि पुरुषों के लिए भी एक बॉयोलॉजिकल पैमाना है। यानि कि पुरुष किसी भी उम्र में पिता बन सकते हैं लेकिन बढ़ती उम्र को देखते हुए बच्चे की सेहत पर इसका असर पड़ेगा।
विश्वभर में महिलाएं ही नहीं पुरुष भी हो रहे बांझपन का शिकार
अमेरिकन सोसायटी फॉर रिप्रोडक्टिव मेडिसिन की एक रिपोर्ट के अनुसार पुरुषों में फर्टिलिटी को प्रभावित करने वाला प्रमुख कारक टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का लेवल है। इसका सीधा असर स्पर्म काउंट पर पड़ता है। इसके अलावा पुरुषों के फर्टिलिटी रेट को स्पर्म की गतिशीलता भी प्रभावित करती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार विश्वभर में बांझपन के शिकार पुरुष और महिलाओं का प्रतिशत 20 से 40 प्रतिशत तक है। वहीं भारत में बांझपन के शिकार पुरुषों की संख्या 23 प्रतिशत हैं।
मेल इन्फर्टिलिटी को प्रभावित करने वाले कारक
पुरुषों में बांझपन यानि मेल इन्फर्टिलिटी भी एक बड़ा कारण है, जिसकी वजह से कई कपल्स को कंसीव करने में समस्या होती है। इसके पीछे कई कारक होते हैं।
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