हेल्थ डेस्क. गलत लाइफस्टाइल की वजह से पुरुषों का स्पर्म काउंट कम होता जा रहा है। जो लोग शारीरिक रूप से ज्यादा मेहनत करते हैं उनमें स्पर्म काउंट हाई रहता है। हार्वर्ड टीएच चैन स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ एंड मास जनरल ब्रिघम ने शोध में यह खुलासा किया है।
हार्वड में किए गए नए शोध के मुताबिक जो पुरुष नौकरी पर नियमित रूप से भारी वस्तुओं को उठाते हैं या फिर उसे एक जगह से दूसरे जगह पर ले जाते हैं। उनमें स्पर्म की संख्या ज्यादा होती है। ब्रिघम और महिला अस्पताल हार्वर्ड में किए गए शोध जिसे ह्यूमन रिप्रोडक्शन जर्नल में प्रकाशित किया या है उसके मुताबिक यह शोध प्रजनन क्षमता पर इनवर्मेंट और लाइफस्टाइल के कारकों के प्रभाव को निर्धारित करने के लिए किया गया था।
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इतने लोगों पर हुआ शोध इस शोध में फर्टिलिटी सेंटर में इलाज कराने वाले जोड़ों में 377 पुरुष पार्टनर पर किया गया। जिसमें यह निष्कर्ष निकालना था कि पेशेवर या व्यावसायिक कारक स्पर्म काउंट से जुड़े हैं या नहीं। पुरुषों ने अपने काम के बारे में बताया। जिसमें शारीरिक मेहनत भी शामिल थी। जैसे भारी वस्तु को उठाना, उसे एक जगह से दूसरी जगह ले जाना।
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भारी वजन उठाने से लाभ देखा गया शोध में यह सामने आया कि जिन पुरुषों ने अपनी नौकरी के दौरान हैवी वेट उठाने की सूचना दी, उनमें 46 प्रतिशत अधिक स्पर्म दूसरे पुरुषों की तुलना में ज्यादा थी।
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उच्च टेस्टोस्टेरोन गाढ़ापन होता है शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि काम पर भारी या मध्यम स्तर के शारीरिक मेहनत में शामिल पुरुषों में हल्के परिश्रम करने वाले लोगों की तुलना में टेस्टोस्टेरोन का गाढ़ापन ज्यादा होता है। इतना ही नहीं फीमेल हार्मोन एस्ट्राडियोल भी ज्यादा और गाढ़ा होता है।
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क्या वर्क टाइमिंग का भी होता है असर स्टडी में यह भी पाया गया कि जिन पुरुषों ने नाइट शिफ्ट या रोटेटिंग शिफ्ट में काम किया, उनमें केवल दिन की शिफ्ट में काम करने वाले पुरुषों की तुलना में 24 प्रतिशत अधिक टेस्टोस्टेरोन और 45 प्रतिशत अधिक एस्ट्रोजन गाढ़ापन था। यानी अगर स्पर्म की संख्या बढ़ानी है तो ऑफिस हो या फिर घर हैवी वजन उठाना शुरू कर दें।
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