
हेल्थ डेस्क: अक्टूबर का महीना ब्रेस्ट कैंसर अवेयरनेस के रूप में मनाया जाता है।इस महीने को सेलिब्रेट करने का मुख्य मकसद लोगों के बीच स्तन कैंसर संबंधित जागरूकता फैलाना है।आज न सिर्फ देश में बल्कि की दुनिया में ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित महिलाओं की संख्या बढ़ रही है। महिलाओं को यह जानना बहुत जरूरी है कि ब्रेस्ट कैंसर किन कारणों से पैदा हो सकता है। आईए जानते हैं लाइफस्टाइल के कौन से बदलाव कैंसर के खतरे को कम कर देते हैं।
मेंटेन वेट घटाएगा ब्रेस्ट कैंसर का खतरा
महिलाओं में 45 से 50 की उम्र में मीनोपॉज हो जाता है और उसके बाद वजन भी बढ़ने लगता है। एस्ट्रोजन के अधिक लेवल के कारण ब्रेस्ट कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में बैलेंस डाइट और रेगुलर एक्सरसाइ की मदद से ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को कम किया जा सकता है।
एक्सरसाइज से भगाएं ब्रेस्ट कैंसर को
घर के कामों के बीच महिलाएं एक्सरसाइज करने का समय नहीं निकाल पाती है। जबकि ब्रेस्ट कैंसर के खतरे से बचने के लिए रोजाना एक्सरसाइज बहुत जरूरी है। आप हफ्ते में 150 मिनट तक मॉडरेट एरोबिक एक्टिविटी करके ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को घटा सकती हैं। या फिर रोजाना 20 मिनट की वॉक जरूर करें।
एल्कोहल को कहें ना
जो महिलाएं अधिक मात्रा में ड्रिंक करती हैं, उनमें एस्ट्रोजन लेवल बढ़ने का खतरा रहता है। साथ ही डीएनए भी डैमेज हो सकता है। इस कारण से भी ब्रेस्ट कैंसर के चांसेज बढ़ जाते हैं। आप ड्रिंकिंग की मात्रा कम करके या ड्रिंक पूरी तरीके से बंद करके भी ब्रेस्ट कैंसर के खतरे से बच सकती हैं।
एंटीऑक्सीडेंट फूड्स करेंगे कैंसर से बचाव
आपको अपने खाने में न्यूट्रिएंट बेस्ड डायट लेनी चाहिए। रोजाना ताजे फल, सब्जियां, अनाज, लीन प्रोटीन आदि इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने का काम करती है। साथ ही कैंसर का खतरा भी कम हो जाता है। एंटीऑक्सीडेंट फूड, फाइबर फूड, हेल्दी फैट्स जैसे कि ओमेगा-3 आपको खाने में जरूर शामिल करने चाहिए।
जहरीले कैमिकल्स से रहें दूर
ब्रेस्ट कैंसर का खतरा जहरीली चीजों से ही बढ़ता है। आपको कुछ केमिकल्स, कॉस्मेटिक, प्लास्टिक बैग या फिर पेस्टिसाइड से बचना चाहिए जो ब्रेस्ट कैंसर का खतरा बढ़ा सकते हैं। बेहतर होगा कि नैचुरल ऑर्गेनिक प्रोडक्ट का इस्तेमाल करें और प्लास्टिक कंटेनर में कभी भी गरम खाना रखने की भूल न करें।
हॉर्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी है से खतरा
इस्ट्रोजन व प्रोजेस्टेरोन हार्मोन की रिप्लेसमेंट थेरेपी ले रहे है तो ब्रेस्ट कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी का कम डोज लेना चाहिए और कम समय के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
रेगुलर स्क्रीनिंग की मदद से ब्रेस्ट कैंसर डायग्नोज किया जा सकता है। अगर कैंसर शुरुआत में ही डायग्नोज कर लिया जाए तो ट्रीटमेंट में आसानी होती है। आप हेल्दी लाइफ़स्टाइल अपना कर काफी हद तक ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को कम कर सकती हैं। अगर आपको ब्रेस्ट में कभी भी गांठ महसूस हो या फिर निप्पल से डिस्चार्ज आए तो बिना देरी किए डॉक्टर सेपरामर्श करना चाहिए। आपकी थोड़ी सी सतर्कता बीमारी को बड़ा बनाने से रोक सकती है।
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