
हेल्थ डेस्क: कर्नाटक में तेजी से बढ़ते डेंगू के मामले से सावधान रहने की जरूरत है। महामारी के रूप में घोषित होने के बाद डेंगू को लेकर कई नए नियम बना दिए गए हैं। केवल जनवरी से जुलाई तक में कर्नाटक में 7 लोगों को मौत डेंगू से हो चुकी है वहीं 7,362 डेंगू मरीज डायग्नोज हुए हैं। जानिए बच्चों में डेंगू होने पर क्या करना चाहिए।
बच्चों में गंभीर डेंगू के लक्षण
एडीज मच्छर से फैलने वाला डेंगू एक वायरल बीमारी है। अगर समय रहते डेंगू के लक्षणों की पहचान नहीं हो पाती है तो बच्चे को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। आमतौर पर डेंगू होने पर बदन दर्द, बुखार आदि लक्षण दिखते हैं। जब गंभीर डेंगू हो जाता है तो डेंगू के लक्षण डरा सकते हैं।
बच्चों को गंभीर डेंगू होने पर न सिर्फ बुखार आता है बल्कि नाक से खून निकलना, त्वचा पर चकत्ते होना, मसूड़ों से खून आना, उल्टी होना, रक्त का थक्का बनना, पेट में तेज दर्द आदि लक्षण दिखाई देते हैं। अगर बच्चे में एक भी लक्षण नजर आएं तो उसे तुरंत एमरजेंसी केयर की जरूरत होती है।
बच्चों को डेंगू में इमरजेंसी केयर
NVBDCP की रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में 15 वर्ष से कम बच्चें डेंगू की चपेट में जल्दी आते हैं। ऐसा बच्चों में कम इम्यूनिटी के कारण होता है। अगर बच्चे में डेंगू के लक्षण दिखाई दें तो उसे तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराएं। बच्चें को हाइड्रेट रखने के लिए पानी देते रहना चाहिए। डॉक्टर प्लेटलेट ट्रांसफ्यूजन के साथ ही डेंगू के लक्षणों को कम करने की कोशिश करते हैं। तुरंत उपचार मिलने से शरीर के अंदर ब्लीडिंग होने की संभावना कम हो जाती है। साथ ही बच्चे में गंभीर डेंगू लक्षण कम होते हैं।
ऐसे करें डेंगू से बचाव
डेंगू की बीमारी से बचाव उसकी रोकथाम है। आप घर के आस-पास पानी जमा न होने दें। बच्चों को मच्छरदानी में ही सुलाएं। साथ ही बच्चों को फुल आस्तीन वाले कपड़े पहनाएं। मॉस्किटो रेपेलेंट क्रीम का इस्तेमाल भी कर सकते हैं।
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