
भले ही डॉक्टर 20 से 30 साल की उम्र को गर्भावस्था की सही उम्र मानें लेकिन आजकल महिलाएं देर से प्रेग्नेंसी प्लान कर रही हैं। इस दौरान मां और बच्चे दोनों की हेल्थ पर थोड़ा ज्यादा ध्यान देने की जरूरत पड़ती है। 35 प्लस प्रेग्नेंसी को मेडिकल भाषा में एडवांस मैटरनल प्रेग्नेंसी भी कहा जाता है। ये टेस्ट प्रेगनेंसी संबंधी रिस्क की जानकारी दे देते हैं। जानिए अधिक उम्र प्रेग्नेंसी में 5 जरूरी टेस्ट कौन से हैं।
बच्चों में डाउन सिंड्रोम के साथ ही अन्य एबनॉर्मलटीज को टेस्ट करने के लिए डॉक्टर एनटी टेस्ट और डबल मार्कर टेस्ट की सलाह देते हैं। प्रेगनेंसी के 11 से 14 हफ्ते के बीच इस टेस्ट को किया जाता है।
नॉन इनवेसिव प्रीनेटल टेस्ट की मदद से बच्चे में क्रोमोसोम संबंधी समस्याओं का जोखिम पता चलता है। बच्चे के स्वास्थ्य के लिए ये टेस्ट सुरक्षित माना जाता है और डॉक्टर इसकी सलाह देते हैं।
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18 से 22 हफ्ते के बीच एक टेस्ट किया जाता है, जिससे बच्चे के शरीर के विकास की डिटेल मिलती है। इसमें बच्चे के दिल, दिमाग, रीढ़ और अन्य अंगों की स्थिति पता चल जाती है। यह टेस्ट बच्चे के विकास को समझने में मदद करता है।
बढ़ती उम्र में मां बनने पर डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है, जिसे जेस्टेशनल डायबिटी कहा जाता है। समय पर शुगर कंट्रोल करना मां और बच्चे दोनों की सेहत के लिए बेहद जरूरी होता है। इसलिए ये टेस्ट जरूर कराना चाहिए।
35 प्लस प्रेग्नेंसी में हाई ब्लड प्रेशर और प्रेग्नेंसी से जुड़ी अन्य समस्याओं का खतरा थोड़ा बढ़ सकता है। इसलिए समय समय पर BP और यूरिन टेस्ट करवाना जरूरी माना जाता है। इससे डॉक्टर समय रहते किसी भी समस्या को पहचान सकते हैं। अगर कुछ बातों का ध्यान रखा जाए, तो अधिक उम्र में भी स्वस्थ्य बच्चे को जन्म दिया जा सकता है।
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