एक अमेरिकी महिला ने दवा की कीमतों में भारी अंतर उजागर किया। अमेरिका में $1,000 की दवा उन्हें भारत से सिर्फ $25 में मिली। इस घटना ने अमेरिका की महंगी स्वास्थ्य प्रणाली और भारत की सस्ती जेनेरिक दवाओं पर बहस छेड़ दी है।

एक अमेरिकी महिला ने जब अमेरिका और भारत में मिलने वाली एक ही दवा की कीमतों का फर्क देखा तो उसके होश उड़ गए। महिला ने एक वीडियो बनाकर बताया कि जो दवा अमेरिका में 1,000 डॉलर (करीब 95,000 रुपये) की मिल रही थी, वही दवा भारत से मंगवाने पर उसे सिर्फ 25 डॉलर (लगभग 2,300 रुपये) में मिल गई। इस वीडियो के बाद से ही सस्ती स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर ऑनलाइन बहस छिड़ गई है।

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इंस्टाग्राम पर विक्टोरिया नाम की इस महिला ने अपना अनुभव शेयर किया। दवा हाथ में लेकर उन्होंने कीमतों के भारी अंतर पर हैरानी जताई। उन्होंने इसे अमेरिका के खराब हेल्थकेयर सिस्टम का एक उदाहरण बताया। विक्टोरिया ने बताया कि उन्हें सिर्फ छह गोलियों की जरूरत थी, लेकिन उनकी इंश्योरेंस कंपनी ने दवा का खर्च उठाने से मना कर दिया। इसलिए उन्हें पूरी कीमत अपनी जेब से देनी पड़ रही थी। वीडियो में उन्होंने कहा, “इस दवा के लिए मुझे अमेरिका में अपनी जेब से 1,000 डॉलर देने पड़ते, लेकिन मैंने इसे 25 डॉलर में खरीदा। हां, सिर्फ छह छोटी गोलियों के लिए 1,000 डॉलर, क्योंकि मेरा इंश्योरेंस इसे कवर नहीं कर रहा था।”

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इतनी बड़ी रकम खर्च करने से इनकार करते हुए, विक्टोरिया ने अपने डॉक्टर से दूसरे विकल्पों के बारे में पूछा। उनके मुताबिक, डॉक्टर ने उन्हें एक कनाडाई फार्मेसी के जरिए दवा मंगवाने की सलाह दी, जो सीधे एक भारतीय निर्माता से दवा ले सकती थी। तब भी उन्हें उम्मीद थी कि दवा की कीमत कई सौ डॉलर होगी। लेकिन जब उन्हें कीमत बताई गई तो वह हैरान रह गईं। उन्होंने कहा, "उन्होंने बताया कि कीमत 25 डॉलर है। 10 डॉलर दवा के लिए और 15 डॉलर शिपिंग के लिए। सीधे भारत में निर्माता से मुझ तक अंतरराष्ट्रीय शिपिंग का चार्ज।"

इस भारी अंतर ने विक्टोरिया को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि अमेरिका में उसी दवा की कीमत इतनी ज्यादा क्यों है। अमेरिकी हेल्थकेयर सिस्टम की तीखी आलोचना करते हुए उन्होंने इसे "एक मजाक" बताया और कहा कि मरीजों पर गलत तरीके से बहुत ज्यादा लागत का बोझ डाला जा रहा है। उन्होंने कहा, "हमारे साथ पूरी तरह से स्कैम हो रहा है। इसका क्या मतलब है कि यह एक हजार डॉलर की पड़ने वाली थी? और मैं दवा के लिए सिर्फ 10 डॉलर दे पाई।"

विक्टोरिया ने यह भी सवाल उठाया कि अतिरिक्त लागत कहां जा रही है, यह कहते हुए कि आम लोगों को अक्सर हेल्थकेयर सिस्टम की खामियों और बढ़े हुए दामों की कीमत चुकानी पड़ती है। उनका वीडियो तेजी से वायरल हो गया। कई लोगों ने अमेरिका में दवाओं की बढ़ती कीमतों और इंश्योरेंस से जुड़ी बाधाओं पर उनकी तरह ही निराशा जताई। वहीं, कई लोगों ने भारत की विशाल जेनेरिक दवा इंडस्ट्री की ओर इशारा किया, जिसने बड़े पैमाने पर सस्ती दवाएं बनाने के लिए दुनिया भर में अपनी पहचान बनाई है।