Advanced breast cancer: लंदन के इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर रिसर्च द्वारा विकसित नया ब्लड टेस्ट ctDNA की मदद से एडवांस ब्रेस्ट कैंसर का पता लगाने और ट्रीटमेंट के असर को समझने में मदद करता है। जानें क्या है ctDNA और कैसे करता है काम।
बदलते समय में ब्रेस्ट कैंसर की जांच और इलाज पहले से कहीं ज्यादा एडवांस हो चुके हैं। अब टेस्ट सिर्फ मैमोग्राम तक सीमित नहीं है। आपको जानकर हैरानी होगी कि साल 2022 में कैंसर में 23 लाख के करीब महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर डिटेक्ट हुआ था। ज्यादातर महिलाएंं ऐसी थी जिनका कैंसर एडवांस स्टेज में पहुंच चुका था। ऐसा सही समय पर टेस्ट न होने के कारण हुआ। अब ब्रेस्ट कैंसर की जांच आसान हो गई है। ब्लड टेस्, जेनेटिक टेस्ट और एडवांस इमेजिंग तकनीकों की मदद से बीमारी का पता शुरुआत में ही चल जाता है।
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ब्लड से पता चलेगा कैंसर का घटना या बढ़ना
लंदन स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर रिसर्च की एक टीम ने एक ऐसा ब्लड टेस्ट खोजा है, जिसकी मदद से एडवांस ब्रेस्ट कैंसर का पता लगाया जा सकता है। क्लिनिकल कैंसर रिसर्च पेपर में प्रकाशित इस स्टडी में कई अहम जानकारी मिली हैं। ये स्टडी मुख्य रूप से कैंसर सेल्स के द्वारा ब्लड में छोड़े गए सुर्कुलेटिंग ट्यूमर डीएनए (ctDNA) पर आधारित था।
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क्या होता है ctDNA?
ये एक प्रकार का ट्यूमर डीएनए है, जो कैंसर कोशिकाओं से निकले जेनेटिक पदार्थ का टुकड़ा होते हैं।ब्लड फ्लो के साथ ही ये घूमते रहते हैं। इन ctDNA से ट्यूमर में हो रहे जेनेटिक चेंज का पता चल जाता है। इसकी मदद से डॉक्टर जांच करते हैं कि टेस्ट का सही असर पेशेंट्स में हो रहा है या फिर नहीं।
जब पेशेंट के ब्लड में ctDNA बढ़ जाता है, तो इसका मतलब ये है कि कैंसर बढ़ रहा है, वहीं इसकी घटती मात्रा ट्रीटमेंट का सकारात्मक असर बताती है। कैंसर एक्सपर्ट मानते हैं ब्लड टेस्ट की मदद से भले ही कैंसर के ट्रीटमेंट का असर पता चल जाए लेकिन कंफर्म नहीं होगा कि मरीज रोगमुक्त हो चुका है। रोग का पुनरावर्तन हो सकता है।
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