
Rabies: रेबीज एक घातक वायरल बीमारी है। यह इंसान के केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करती है। टीकों और इलाज की सीमित पहुंच वाले इलाके में यह बड़ी चिंता का विषय है। रेबीज मुख्य रूप से संक्रमित जानवर के काटने से फैलता है। लक्षण दिखने के बाद यह घातक हो जाता है। हालांकि, समय पर टीकाकरण और उचित देखभाल के माध्यम से इसे पूरी तरह रोका जा सकता है। आइए रेबीज के बारे में जानते हैं।
रेबीज संक्रमित लार या तंत्रिका तंत्र के ऊतकों के सीधे संपर्क में आने से फैलता है। आमतौर पर किसी पागल जानवर के काटने या खरोंच लगाने से यह फैलता है। रेबीज एक घातक बीमारी है। समय पर इलाज से इसे रोका जा सकता है। इलाज नहीं किए जाने पर यह इंसानों और पालतू जानवरों में फैल सकता है। रेबीज के दो लक्षण हैं। उग्र और पक्षाघातकारी। उग्र रेबीज इंसान में रेबीज का सबसे आम रूप है।
रेबीज वायरस गर्म खून वाले जानवरों द्वारा फैलता है। यह संक्रमित जानवर की लार में जमा हो जाता है। इंसान को आमतौर पर संक्रमित जानवर के काटने से रेबीज होता है। पालतू जानवरों की बात करें तो बिल्ली, गाय, कुत्ता, फेरेट, बकरी और घोड़े को अगर पहले से रेबीज है और उसने काट लिया तो इंसान को यह बीमारी लग सकती है। जंगली जानवरों की बात करें तो चमगादड़, बीवर, कायोटी, लोमड़ी, बंदर, रैकून, स्कंक और वुडचक्स के काटने से यह बीमारी लग सकती है।
WHO के अनुसार रेबीज एक वैश्विक स्वास्थ्य चिंता है। यह अंटार्कटिका को छोड़कर सभी महाद्वीपों पर मौजूद है। लक्षण दिखने के बाद यह बीमारी घातक होती है। इसके चलते दुनियाभर में हर साल लगभग 60,000 लोगों की जान जाती है। अधिकतर मौतें एशिया और अफ्रीका में होती हैं। इंसान में रेबीज सबसे अधिक कुत्ता से फैलता है। कुत्ते रेबीज से इंसान की मौत के 99% मामलों में जिम्मेदार हैं।
बच्चे जानवरों के साथ संपर्क के कारण विशेष रूप से असुरक्षित होते हैं। कई बार वे काटने की सूचना भी नहीं देते हैं। हालांकि लक्षण दिखने के बाद कोई प्रभावी इलाज नहीं है, लेकिन संपर्क से पहले या तुरंत बाद टीकाकरण से बीमारी को रोका जा सकता है। इसलिए जैसे ही कुत्ता या किसी और जानवर द्वारा काटे जाने की जानकारी मिले तुरंत डॉक्टर के पास जाना और जरूरी हो तो रेबीज का टीका लगवाना जरूरी है।
रेबीज वायरस खुले घाव के माध्यम से शरीर में प्रवेश करता है। आमतौर पर जानवर के काटने पर संक्रमित लार पीड़ित के शरीर के संपर्क में आता है। इससे वायरस पीड़ित के शरीर में घुस जाता है और धीरे-धीरे नसों के माध्यम से केंद्रीय तंत्रिका तंत्र तक पहुंचता है। यह वायरस दिमाग को नुकसान पहुंचाता है। इससे पीड़ित में न्यूरोलॉजिकल लक्षण पैदा होते हैं। इलाज न किए जाने पर रेबीज के कारण कोमा और मौत हो सकती है।
रेबीज के लक्षण दिखने में कई सप्ताह लग सकते हैं। एक बार जब वे दिखाई देते हैं तो वे चरणों से गुजरते हैं। रिपोर्टों के अनुसार, प्रारंभिक प्रोड्रोमल चरण में फ्लू जैसे लक्षण शामिल होते हैं जैसे- बुखार, थकान, काटने वाली जगह पर जलन, खुजली, झुनझुनी, दर्द या सुन्नता, खांसी, गले में खराश, मांसपेशियों में दर्द, दस्त, मतली और उल्टी।
रेबीज लगभग हमेशा ही घातक होता है। लक्षण दिखाई देने के बाद रोगी के लिए कोई प्रभावी इलाज नहीं है। WHO की रिपोर्ट के अनुसार, कुछ दुर्लभ मामले में मरीज की जान बच जाती है। जिन लोगों को पहले से रेबीज का टीका लगा होता है उनके बचने की संभावना अधिक होती है। रेबीज से इंसानों की मौत रोकने का सबसे प्रभावी तरीका कुत्तों को टीका लगाना है।
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