Postpartum Psychosis: 15 दिन के बच्चे को मां ने फ्रिज में सुलाया, जानें इस खतरनाक बीमारी के बारे में

Published : Sep 10, 2025, 03:24 PM IST
Postpartum Psychosis

सार

Postpartum Psychosis: 23 साल की मां अपने 15 दिन के बच्चे को फ्रिज में रख कर सो गई। फैमिली को जब रोने की आवाज आई,तो जाकर बच्चे को बचाया। मेडिकल टेस्ट में पता चला कि मां को पोस्टपार्टम साइकोसिस हुआ था। उसे पता ही नहीं था कि वो क्या कर रही है। 

Mother Mental illness After Delivery: यूपी के मुरादाबाद से एक बेहद संवेदनशील और चिंताजनक मामला सामने आया है। यहां 23 साल की एक मां ने अपने 15 दिन के बच्चे को फ्रिज में रख दिया और खुद सोने चली गई। जब बच्चे के रोने की आवाज सुनकर सास ने फ्रिज खोला तो अंदर ठंड से ठिठुरते बच्चे को देखकर वह दंग रह गईं। तुरंत बच्चे को डॉक्टर के पास ले जाया गया, जिससे उसकी जान बच गई। जब परिवार ने यह पूछा कि ऐसा क्यों किया, तो मां ने शांत स्वर में जवाब दिया, 'वह नहीं सो रहा था, इसलिए फ्रिज में रख दिया।' इस प्रतिक्रिया ने पूरे परिवार को झकझोर दिया।

फैमिली को लगा कि महिला पर आत्मिक शक्ति का साया है

अब सवाल उठता है कि आखिर एक मां ने अपने जिगर के टुकड़े के साथ ऐसा क्यों किया? क्या उस पर किसी भूत-प्रेत का असर था या वह किसी मानसिक बीमारी से जूझ रही थी? शुरुआत में परिवार को लगा कि महिला पर किसी आत्मिक शक्ति का साया है, इसलिए वे उसे तांत्रिक के पास ले गए। लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा। बाद में किसी ने सलाह दी कि उसे डॉक्टर को दिखाया जाए।

पोस्टपार्टम साइकोसिस की शिकार थी महिला

परिवार जब महिला को साइकाइट्रिस्ट के पास ले गया तो काउंसलिंग के दौरान जो सच्चाई सामने आई, उसने सबको चौंका दिया। महिला पोस्टपार्टम साइकोसिस नामक बीमारी से पीड़ित थी, जो बच्चे के जन्म के बाद होती है। यह बीमारी अपने अंतिम स्टेज पर पहुंच चुकी थी, और उसे खुद भी नहीं पता था कि वह क्या कर रही है। अब जानते हैं कि आखिर पोस्टपार्टम साइकोसिस क्या है।

क्या है पोस्टपार्टम साइकोसिस? (What is Postpartum Psychosis)

पोस्टपार्टम साइकोसिस (Postpartum Psychosis) प्रसव के तुरंत बाद कुछ महिलाओं में पाया जाता है और यह एक न्यूरो-साइकियाट्रिक इमरजेंसी सिचुएशन है, जो आम ‘बेबी ब्लूज़’ या पोस्टपार्टम डिप्रेशन से भिन्न और अधिक गंभीर होती है। इसमें मां वास्तविकता (रियलिटी) से कट जाती है, भ्रम, मतिभ्रम (delusions), अव्यवस्थित व्यवहार, और कभी-कभी खुद या बच्चे को नुकसान पहुंचाने तक की प्रवृत्ति विकसित हो जाती है।

पोस्टपार्टम साइकोसिस के लक्षण

  • भ्रम व मतिभ्रम- ऐसी बातें देखना या सुनना जो वास्तविकता में नहीं होतीं।
  • गहरा भ्रम व भ्रमित मानसिक स्थिति- ज्ञात चेहरे पहचानने में असमर्थ होना या समझ खो जाना।
  • मूड स्विंग्स - अत्यधिक उत्तेजना, दुःख, अवसाद जैसे मनोभाव अचानक आ जाना।
  • खतरे की अनजान भावना -  ऐसा लगना कि लोग उससे दुश्मनी रखते हैं या उसे नुकसान पहुंचा सकते हैं।
  • अव्यवस्थित व्यवहार - स्व-देखभाल या बच्चे की देखभाल में असमर्थता।
  • हानि की कल्पनाएं - मां या बच्चे को नुकसान पहुंचाने का ख्याल।

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पोस्टपार्टम साइकोसिस के कारण क्या होता है?

इसका सटीक कारण पूरी तरह नहीं समझा गया है, लेकिन कुछ जोखिम कारकों में शामिल हैं:

  • जन्म के बाद महत्वपूर्ण हार्मोनल बदलाव
  • नींद की कमी (Sleep deprivation)
  • मानसिक बीमारी का पारिवारिक इतिहास
  • यदि समय रहते इलाज शुरू हो जाए, तो ज्यादातर महिलाएं पूरी तरह स्वस्थ होकर सामान्य जीवन की ओर लौट सकती हैं।

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