First Case Of Stone Man Syndrome: स्टोन मैन सिंड्रोम (FOP) नामक रेयर जेनेटिक बीमारी का पहला केस राजस्थान के 9 साल के बच्चे में पाया गया। इस बीमारी में मांसपेशियां हड्डियों में बदलने लगती हैं। जानें इसके लक्षण, कारण और इलाज की संभावना क्या है।
हड्डियां शरीर को मजबूती प्रदान करती हैं और साथ ही आकार भी देती हैं। वहीं मांसपेशियां हड्डियों की रक्षा और सहारा देने का काम करती हैं। सोचिए मांसपेशियां ही हड्डियों की तरह कठोर बनने लगे तो क्या होगा? राजस्थान के जैसलमेर से एक ऐसा ही केस सामने आया जहां 9 साल का बच्चा रेयर जेनेटिक बीमारी स्टोन मैन सिंड्रोम से पीड़ित पाया गया। आपको जानकर हैरानी होगी कि 20 लाख लोगों में से किसी एक को ये बीमारी होती है। जोधपुर एम्स अस्पताल के डॉक्टर्स भी इस बीमारी को लेकर हैरान हैं। जानिए स्टोन मैन सिंड्रोम के लक्षण क्या होते हैं और बीमारी के ठीक होने की संभावना कितनी रहती है।
स्टोन मैन सिंड्रोम बीमारी क्या है?
स्टोन मैन सिंड्रोम एक रेयर जेनेटिक डिजीज है, जिसे फाइब्रोडिस्प्लासिया आसिफिकन्स प्रोग्रेसिवा(FOP) कहा जाता है। इस बीमारी में शरीर के सॉफ्ट टिश्यू जैसे मसल्स असामान्य रूप से हड्डी में बदलने लग जाती है। शरीर धीरे-धीरे स्टोन की तरह कठोर होने लगता है। इसे मेडिकल भाषा में “ऑसिफिकेशन” कहा जाता है। ACVR1 जीन में बदलाव के कारण ये बीमारी होती है। बीमारी के कारण शरीर की मूवमेंट धीमे-धीमे कम होने लगती है।
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स्टोन मैन सिंड्रोम के लक्षण क्या हैं?
- शरीर के जोड़ों के साथ में सूजन और दर्द
- ज्वाइंट्स का जाम होना
- गर्दन, पीठ और कंधों में अकड़न महसूस होना
- शरीर में नई हड्डी बनना
- जन्म से ही पैरों के अंगूठे का असामान्य आकार
स्टोन मैन सिंड्रोम का इलाज क्या है?
अभी तक इस बीमारी का कोई भी इलाज डॉक्टर्स के पास नहीं है।समस्या होने पर डॉक्टर केवल लक्षणों को कंट्रोल करने और दर्द कम करने के लिए मरीज को मेडिसिंस देते हैं। अगर पीड़ित व्यक्ति चोट से बचाव करता है, तो लक्षणों को बढ़ने से रोका जा सकता है। ऐसे व्यक्ति को बिना डॉक्टर की सलाह के कोई सर्जरी नहीं करानी चाहिए और साथ ही दवा का सेवन भी नहीं करना चाहिए।
