Apple Watch में शुरू किए गए Sleep Apnea फीचर का काम क्या है? Apple के अनुसार यह फीचर नींद के दौरान किस तरह की गड़बड़ियों को पहचानता है? AirPods Pro का नया Hearing Test फीचर कैसे काम करता है? यूजर्स अपने हेल्थ डेटा को डॉक्टर के साथ किस तरीके से शेयर कर सकते हैं?
भारत में एपल वॉच और एयरपॉड्स प्रो इस्तेमाल करने वालों के लिए अच्छी खबर है। कंपनी ने अपने कुछ दमदार हेल्थ फीचर्स अब भारत में भी शुरू कर दिए हैं। भारत एपल के सबसे बड़े बाजारों में से एक है और कंपनी यहां लगातार अपने हेल्थ-टेक फीचर्स बढ़ा रही है। इनमें से पहला है स्लीप एपनिया डिटेक्शन, जो कुछ साल पहले एपल वॉच सीरीज 10 के साथ आया था। दूसरा फीचर एयरपॉड्स प्रो से जुड़ा है, जिससे आप डॉक्टर के पास जाए बिना अपने कानों का टेस्ट कर सकते हैं। चलिए, इन दोनों फीचर्स को थोड़ा और करीब से समझते हैं।

अब भारतीय यूजर्स को मिलेगा स्लीप एपनिया फीचर
एपल के मुताबिक, स्लीप नोटिफिकेशन सिस्टम को क्लिनिकल-ग्रेड स्लीप एपनिया टेस्ट के बड़े डेटा और एडवांस्ड मशीन लर्निंग की मदद से तैयार किया गया है। कंपनी का कहना है कि यह फीचर नींद के दौरान सांस लेने के पैटर्न में होने वाली गड़बड़ी को कलाई पर लगे एक्सेलेरोमीटर से पहचानता है। अगर एक्सेलेरोमीटर को लगातार गंभीर स्लीप एपनिया के संकेत मिलते हैं, तो यूजर को इसका नोटिफिकेशन भेजा जाएगा।
यह एडवांस्ड फीचर यूजर की नींद को मॉनिटर करेगा और अगर उसे स्लीप एपनिया (एक गंभीर नींद की बीमारी जिसमें सांस बार-बार रुकती और चलती है) के लक्षण दिखते हैं, तो अलर्ट करेगा। हालांकि, एपल ने साफ किया है कि यह फीचर किसी बीमारी का पता लगाने वाला डायग्नोस्टिक टूल नहीं है, बल्कि इसका मकसद यूजर्स को डॉक्टर से जांच कराने के लिए प्रोत्साहित करना है। आप हेल्थ ऐप से डिवाइस का डेटा PDF फॉर्मेट में डाउनलोड करके डॉक्टर को भी भेज सकते हैं।
सुनने की क्षमता होगी बेहतर
दूसरा बड़ा फीचर एयरपॉड्स प्रो यूजर्स के लिए हियरिंग टेस्ट है। कंपनी का दावा है कि ये टेस्ट एक्सपर्ट्स द्वारा सुझाए गए और क्लिनिकली अप्रूव्ड हैं। इस टेस्ट को करने के लिए आपको एयरपॉड्स प्रो को आईफोन या आईपैड से कनेक्ट करना होगा और इसमें करीब पांच मिनट का समय लगेगा।
टेस्ट के बाद यूजर्स को रिजल्ट की पूरी जानकारी मिलेगी। इससे पता चलेगा कि उन्हें सुनने में कोई दिक्कत है या भविष्य में इसका खतरा हो सकता है। सारा डेटा हेल्थ ऐप में सेव हो जाता है, जिसे जरूरत पड़ने पर बेहतर सलाह और इलाज के लिए डॉक्टर के साथ शेयर किया जा सकता है।
