
Symptoms of virtual autism: ऑटिज्म के बारे में तो आप सभी को पता होगा, लेकिन क्या आपने कभी वर्चुअल ऑटिज्म के बारे में सुना है? बता दें कि इस पीढ़ी के बच्चों में ये बीमारी बहुत आम होते जा रही है, और इसके जिम्मेदार माता-पिता को बताया जा रहा है। वर्चुअल ऑटिज्म, ऑटिज्म से अलग है, जिसमें ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों में साधारण बच्चों की तुलना में बोलने, सीखने, समझने, पढ़ने, लोगों के बीच घुलने-मिलने की क्षमता कमजोर होती है। लेकिन वर्चुअल ऑटिज्म के पीछे की वजह बच्चों का ज्यादा से ज्यादा वक्त स्क्रीन से बिताना है। अगर आपका भी बच्चा 1-2 घंटे या इससे ज्यादा स्क्रीन पर बिताता है, तो आपको भी सावधान हो जाना चाहिए। आज हम वर्चुअल ऑटिज्म के बारे में विस्तार जानेंगे, कि ये है क्या, इसके क्या लक्षण, कारण और उपचार है।
Virtual Autism एक आधुनिक मनोवैज्ञानिक स्थिति है, जिसमें छोटे बच्चे बहुत ज्यादा स्क्रीन के सामने रहते हैं, (जैसे मोबाइल, टैबलेट, टीवी) के कारण ऑटिज्म जैसे व्यावहारिक लक्षण दिखने लगते हैं, हालांकि वे वास्तव में ऑटिज्म से ग्रस्त नहीं होते हैं। यह स्थिति neurodevelopmental delay की ओर इशारा करती है और आमतौर पर उन बच्चों में देखी जाती है जिन्हें 2 से 4 साल की उम्र में लंबे समय तक डिजिटल डिवाइस में अपना ज्यादा वक्त बिताते हैं।
WHO के अनुसार 2 साल से कम उम्र के बच्चों को बिल्कुल स्क्रीन न दें।
जैसे पेंटिंग, क्ले से खेलना, किताब पढ़ना, कुछ अच्छा सुनना।
बच्चों को हर दिन बाहर खेलने दें, ज्यादा से ज्यादा पार्क में अपने उम्र के बच्चों के साथ रहना, खाना खेलना।
बच्चे को अपना भरपूर समय दें, उसकी बातों को ध्यान से सुनें और मानें (अगर सही हो तो, सुनकर इग्नोर करने से बच्चों के दिमाग पर बुरा असर पड़ता है)।
समय रहते काउंसलिंग से बहुत फर्क आता है।
हाँ! रिसर्च और एक्सपीरियंस बताते हैं कि यदि शुरुआत में पहचाना जाए और डिजिटल स्क्रीन से दूरी बनाई जाए, तो बच्चे पूरी तरह से सामान्य व्यवहार पर लौट सकते हैं।
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