Virtual Autism: क्या है वर्चुअल ऑटिज्म?  जानें कैसे नॉर्मल बच्चे भी हो रहे हैं इसके शिकार!

Published : Jul 21, 2025, 05:54 PM IST
What is Virtual Autism

सार

छोटा हो या बड़ा, आजकल हर बच्चे के हाथ में मोबाइल दिख जाएगा, लेकिन क्या आपको पता है कि एक छोटे बच्चे का घंटों मोबाइल और टीवी के सामने रहना उसे वर्चुअल ऑटिज्म का शिकार बना सकता है ? अगर नहीं तो इस आर्टिकल को पढ़ें और समझें कि क्या है ये नई परेशानी।

Symptoms of virtual autism: ऑटिज्म के बारे में तो आप सभी को पता होगा, लेकिन क्या आपने कभी वर्चुअल ऑटिज्म के बारे में सुना है? बता दें कि इस पीढ़ी के बच्चों में ये बीमारी बहुत आम होते जा रही है, और इसके जिम्मेदार माता-पिता को बताया जा रहा है। वर्चुअल ऑटिज्म, ऑटिज्म से अलग है, जिसमें ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों में साधारण बच्चों की तुलना में बोलने, सीखने, समझने, पढ़ने, लोगों के बीच घुलने-मिलने की क्षमता कमजोर होती है। लेकिन वर्चुअल ऑटिज्म के पीछे की वजह बच्चों का ज्यादा से ज्यादा वक्त स्क्रीन से बिताना है। अगर आपका भी बच्चा 1-2 घंटे या इससे ज्यादा स्क्रीन पर बिताता है, तो आपको भी सावधान हो जाना चाहिए। आज हम वर्चुअल ऑटिज्म के बारे में विस्तार जानेंगे, कि ये है क्या, इसके क्या  लक्षण, कारण और उपचार है।

क्या है वर्चुअल ऑटिज्म

Virtual Autism एक आधुनिक मनोवैज्ञानिक स्थिति है, जिसमें छोटे बच्चे बहुत ज्यादा स्क्रीन के सामने रहते हैं, (जैसे मोबाइल, टैबलेट, टीवी) के कारण ऑटिज्म जैसे व्यावहारिक लक्षण दिखने लगते हैं, हालांकि वे वास्तव में ऑटिज्म से ग्रस्त नहीं होते हैं। यह स्थिति neurodevelopmental delay की ओर इशारा करती है और आमतौर पर उन बच्चों में देखी जाती है जिन्हें 2 से 4 साल की उम्र में लंबे समय तक डिजिटल डिवाइस में अपना ज्यादा वक्त बिताते हैं।

ऑटिज्म और वर्चुअल ऑटिज्म में अंतर

  • ऑटिज्म एक जन्मजात न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर होता है।
  • वर्चुअल ऑटिज्म अधिकतर पर्यावरणीय कारणों से होता है, खासकर डिजिटल स्क्रीन के सामने ज्यादा देर तक रहने से।
  • वर्चुअल ऑटिज्म की अगर सही समय पर पहचान कर लिया जाए तो ये डिजिटल डिटॉक्स के जरिए पूरी तरह ठीक भी किया जा सकता है।

लक्षण (Symptoms of Virtual Autism):

  • आंखों से आंख मिलाने में कठिनाई होना।
  • बोलचाल में देरी या शब्द दोहराना।
  • सोशल इंटरेक्शन में कमी।
  • एक ही गतिविधि में घंटों तक व्यस्त रहना (जैसे मोबाइल देखना)।
  • बाहरी वातावरण या लोगों से कोई मतलब और इंटरेस्ट न होना।
  • जब मोबाइल छीना जाए तो गुस्सा आना या चिड़चिड़ापन होना।
  • आवाज या रोशनी के प्रति असामान्य रिएक्शन।

Virtual Autism के प्रमुख कारण:

  • दिनभर मोबाइल या टीवी पर यूट्यूब, गेम्स, रील्स देखना।
  • पैरेंट्स का बीजी रहना और बच्चे को “डिजिटल नैनी” बना देना।
  • आउटडोर खेल या अपनी उम्र के दोस्तों या बच्चों के साथ इंटरेक्शन में कमी।
  • परिवार के साथ समय कम बिताना, बातचीत कम होना, परिवार या पेरेंट्स का अपने बच्चों को कम समय देना।
  • बच्चों को मोबाइल या टीवी के सामने बिठाकर खुद काम में लग जाना।

बचाव और उपचार (Prevention & Treatment):

स्क्रीन टाइम सीमित करें:

WHO के अनुसार 2 साल से कम उम्र के बच्चों को बिल्कुल स्क्रीन न दें।

बच्चे को एक्टिविटी में लगाएं:

जैसे पेंटिंग, क्ले से खेलना, किताब पढ़ना, कुछ अच्छा सुनना।

फिजिकल गेम्स और आउटडोर प्ले:

बच्चों को हर दिन बाहर खेलने दें, ज्यादा से ज्यादा पार्क में अपने उम्र के बच्चों के साथ रहना, खाना खेलना।

परिवार के साथ बातचीत करवाएं:

बच्चे को अपना भरपूर समय दें, उसकी बातों को ध्यान से सुनें और मानें (अगर सही हो तो, सुनकर इग्नोर करने से बच्चों के दिमाग पर बुरा असर पड़ता है)।

पेडियाट्रिक न्यूरोलॉजिस्ट या साइकोलॉजिस्ट से संपर्क करें:

समय रहते काउंसलिंग से बहुत फर्क आता है।

क्या Virtual Autism से उबरना संभव है?

हाँ! रिसर्च और एक्सपीरियंस बताते हैं कि यदि शुरुआत में पहचाना जाए और डिजिटल स्क्रीन से दूरी बनाई जाए, तो बच्चे पूरी तरह से सामान्य व्यवहार पर लौट सकते हैं।

 

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