
Harleigh Tidd Rare Disease Story: मेडिकल की दुनिया में कई ऐसी बीमारी है, जिसके बारे में आम इंसान तो क्या, डॉक्टर को भी नहीं पता है। हर्लीग नाम की एक बच्ची को एक रेयर बीमारी है। वो दुनिया की इकलौती बच्ची है, जिसे ये बीमारी है और वो जिंदगी की जंग लड़ रही है। 3 साल में उसके 38 सर्जरी हो चुके हैं, बावजूद उसके बचने की संभावना बिल्कुल भी नहीं है। चलिए बताते हैं, ब्रिटेन के गेट्सहेड (टाइन एंड वियर) की रहने वाली हर्लीग टिड को कौन सी बीमारी है और कब इसके बारे में पता चला।
हर्लींग की मां स्टेसी बताती हैं कि 36 हफ्ते की प्रेग्नेंसी के दौरान स्कैन हुआ था। जिसमें यह डायग्नोसिस हुआ था कि उसे रहस्यमयी बीमारी है। साल 2022 में प्रेग्नेंसी स्कैन में डॉक्टरों ने हर्लीग के दिल के पास एक काले धब्बे (dark patch) को नोटिस किया। बाद में पता चला कि उसके फेफड़े सिकुड़कर द्रव (fluid) से भर गए हैं और दिल अपनी जगह से खिसक गया है। इसके बावजूद, हर्लीग चमत्कारिक रूप से जन्मी, जबकि उसके जिंदा बचने की संभावना केवल 13 प्रतिशत थी। लेकिन जन्म के कुछ दिनों बाद ही हालत बिगड़ गई, फेफड़े दोबारा सिकुड़ गए और उन्हें सांस लेने में तकलीफ होने लगी।
जन्म के बाद से ही हर्लीग के शरीर से तरल पदार्थ निकालने के लिए छाती में ड्रेन ट्यूब लगाई गई। हर बार जब फेफड़ों से द्रव निकाला जाता, वह फिर भर जाता। बीते तीन सालों में उसने 38 सर्जरी झेलीं। आखिरकार, डॉक्टरों ने बताया कि हर्लीग को Lymphangioleiomyomatosis (LAM) नामक बीमारी है जिसमें फेफड़ों की मांसपेशियों की कोशिकाएं असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं। इसके साथ ही उसे Chylothorax (फेफड़ों में लसिका द्रव का रिसाव) और Skeletal Dysplasia (हड्डियों और जोड़ों की असामान्य बढ़ोतरी) भी है।
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हर्लीग की मां स्टेसी बताती है कि डॉक्टरों ने कहा कि अब इलाज का कोई रास्ता नहीं बचा। हमने पिछले तीन सालों में अस्पताल से बाहर सिर्फ सात महीने बिताए हैं। अब हर्लीग को अंतिम बार ड्रेन ट्यूब लगाई गई है, जो लगभग दस हफ्ते तक काम करेगी। उसके बाद वह कुछ ही दिनों की मेहमान रह जाएगी।
स्टेसी और उनके पति स्टीफन टिड (28) ने हर्लीग के लिए पैलिएटिव केयर (अंतिम समय की देखभाल) शुरू कर दी है और अब वे उसे डिज्नीलैंड ले जाने के लिए फंडरेजिंग कर रहे हैं। स्टेसी कहती हैं कि हम चाहते हैं कि हर्लीग अपने आखिरी दिनों में खुश रहे, उसकी मुस्कान हमेशा याद रहे। वह हमारी ‘लिटिल वॉरियर प्रिंसेस’ है, बीमारी ने उसका शरीर तोड़ दिया लेकिन उसकी मुस्कान नहीं।
परिवार ने निर्णय लिया है कि हर्लीग के निधन के बाद उसके अंग (organs) दान किए जाएंगे, ताकि उसकी कहानी किसी और को जीवन दे सके। स्टेसी ने कहा कि हमारी बच्ची भले चली जाए, लेकिन उसकी रोशनी कई जिंदगियों में जिंदा रहेगी।
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