
लाइफस्टाइल डेस्क। हर साल अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च को पूरी दुनिया में मनाया जाता है। इसकी शुरुआत एक सदी पहले साल 1911 में ही हुई थी। 8 मार्च, 1957 को अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में कुछ महिला मजदूरों ने काम की बेहतर स्थितियों और अच्छे वेतन की मांग को लेकर एक आंदोलन शुरू किया था। इस विरोध प्रदर्शन को तब तो कुचल दिया गया था, लेकिन समान हक और पुरुषों के बराबर वेतन के लिए महिलाओं का संघर्ष जारी रहा। महिलाओं के इसी संघर्ष की याद में आगे चल कर 8 मार्च को महिला दिवस मनाया जाने लगा।
कब से हुई शुरुआत
क्लारा जेटकिन जर्मनी की प्रसिद्ध समाजवादी कार्यकर्ता थीं। उनके प्रयासों से इंटरनेशनल सोशलिस्ट कांग्रेस ने साल 1910 में महिला दिवस को अंतरराष्ट्रीय तौर पर मनाना शुरू किया और इस दिन सार्वजनिक अवकाश दिए जाने की मांग रखी गई। इसके बाद 19 मार्च, 1911 को पहला अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस ऑस्ट्रिया, डेनमार्क, जर्मनी और स्विट्जरलैंड में आयोजित किया गया। बाद में यह तय किया गया कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस हर साल 8 मार्च को मनाया जाएगा। तब से महिला दिवस पूरी दुनिया में 8 मार्च को ही मनाया जाता है।
महिला दिवस मनाने का उद्देश्य
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के आयोजन की शुरुआत समाज में महिलाओं को पुरुषों के बराबर हक देने, समान काम के लिए समान वेतन देने और हर तरह के शोषण, उत्पीड़न और अन्याय से उन्हें मुक्ति दिलाने के उद्देश्य से की गई थी। यह अलग बात है कि एक शताब्दी से ज्यादा समय बीतने के बाद अब महिलाओं की दशा में काफी बदलाव हुआ है और समान काम के बदले समान वेतन के साथ ही उन्हें ऐसे कई अधिकार मिले हैं, जो पहले हासिल नहीं थे। अब वे पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिला कर चल रही हैं। बावजूद इसके महिलाओं का शोषण और उनके साथ गैरबराबरी वाला रवैया पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है। इसीलिए महिलाओं को समाज में समता की स्थापना के लिए उनके संघर्षों की याद दिलाने और प्रेरणा देने के लिए यह दिवस मनाया जाता है।
इस वर्ष क्या है महिला दिवस की थीम
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की थीम हर साल बदलती रहती है। यह लैंगिक समानता यानी जेंडर इक्वलिटी से जुड़ी होती है। इसका मकसद होता है कि महिलाएं किस तरह का अभियान चलाएंगी। इस साल अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की थीम #EachforEqual यानी 'सभी के लिए बराबर' है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के आयोजकों का कहना है कि जब तक सबों को वास्तव में समानता का अधिकार नहीं मिलेगा, दुनिया में विकास संभव नहीं है। उनका कहना है कि व्यक्तिगत तौर पर हम अपने विचारों और कार्यों के लिए जिम्मेदार हैं, लेकिन एक साथ जुड़ कर सामूहिक तौर पर हम लैंगिक समानता के लिए बेहतरीन तरीके से काम कर सकते हैं और स्त्रियों के लिए एक विकसित व सुरक्षित दुनिया बना सकते हैं।
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