International Day of Innocent Children Victims of Aggression:हर साल 4 जून को दुनिया भर में अंतरराष्ट्रीय निर्दोष बाल पीड़ित दिवस मनाया जाता है। आइए बताते हैं इस दिवस के बारे में सबकुछ और देखते हैं कुछ रुलाने वाली तस्वीरें।
4 जून का दिन हमें याद दिलाता है कि दुनिया में आज भी लाखों मासूम बच्चे युद्ध, हिंसा, आक्रोश और संघर्षों का खामियाज़ा भुगत रहे हैं वो भी बिना किसी गलती के। आए दिन बच्चों की भवायह तस्वीरें सामने आती है जिसे देखकर आंखों से आंसू निकल आते हैं।
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इस दिन की शुरुआत क्यों हुई?
इस दिवस की शुरुआत 1982 में संयुक्त राष्ट्र महासभा की ओर से की गई थी। यह दिन विशेष रूप से उस समय के लेबनान-इजराइल युद्ध में प्रभावित बच्चों के सपोर्ट में बनाया गया था। लेकिन धीरे-धीरे इसका मकसद और विस्तार बढ़ता गया।आज यह दिन उन सभी बच्चों के लिए है जो दुनिया के किसी भी कोने में युद्ध, आतंकवाद, यौन हिंसा, मानव तस्करी, बाल सैनिक बनने की मजबूरी, घरेलू हिंसा या किसी भी प्रकार के आक्रोश का शिकार हैं।
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बच्चे कही भी सुरक्षित नहीं
दुनिया भर में चल रहे युद्धों और संघर्षों में उन मासूमों की जान जा रही है जो ना युद्ध को समझते हैं और न ही उसकी राजनीति। घरों में सोते हुए, बाहर खेलते हुए, स्कूलों में पढ़ते समय या अस्पतालों में इलाज के दौरान बच्चे अब कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं।संयुक्त राष्ट्र महासचिव की "Children and Armed Conflict" पर वार्षिक रिपोर्ट (2023) बताती है कि आज का युद्ध बच्चों की मासूमियत पर हमला बन चुका है। 2023 के आंकड़ों के मुताबिक 1,649 बच्चे मारे गए या घायल हुए।
8,655 बच्चों को भर्ती किया गया या जबरन इस्तेमाल किया गया
इसके साथ ही 4,356 बच्चों का अपहरण किया गया, जिनमें सबसे ज्यादा मामले कांगो, सोमालिया और नाइजीरिया से सामने आए। चौंकाने वाली बात यह है कि लगभग 30 प्रतिशत पीड़ित बच्चे लड़कियां थीं। एक बच्चे के साथ क्या होता है, यह उसके लिंग, उम्र, जाति, धर्म, क्षेत्र और आर्थिक स्थिति पर निर्भर करता है।
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1,470 बच्चे यौन हिंसा के शिकार हुए
कॉन्फ्लिक्ट ज़ोन में यौन हिंसा सबसे कम रिपोर्ट होने वाला लेकिन सबसे गंभीर अपराध है। 90% से अधिक यौन हिंसा लड़कियों के खिलाफ हुई, जिनमें जबरन शादी के मामले भी शामिल हैं। लड़कों के खिलाफ यौन हिंसा में भी चिंताजनक बढ़ोतरी देखी गई।
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1,650 बार स्कूलों और अस्पतालों पर हमले
2021 से 2023 तक स्कूलों पर हमले 60% तक बढ़े हैं। खासकर लड़कियों की शिक्षा को निशाना बनाया गया स्कूलों में हमला, लड़कियों का अपहरण और स्कूल जाने से रोकना आम घटनाएं बन चुकी हैं।
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बच्चों ने कोई युद्ध शुरू नहीं किया, फिर भी वे उसकी सबसे बड़ी कीमत चुका रहे हैं।
International Day of Innocent Children Victims of Aggression महज एक तारीख नहीं ,बल्कि एक चेतावनी है दुनिया के लिए कि जब तक हम मासूम बचपन को हथियारों की आग से नहीं बचा सकते, तब तक कोई भी समाज पूरी तरह इंसानियत से भरा नहीं कहला सकता।
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वो तस्वीर जिसने दुनिया को झकझोर कर रख दिया एक छोटा बच्चा, लाल टी-शर्ट और नीली निक्कर में, चेहरा ज़मीन की ओर, समुद्र किनारे की रेत पर बेसुध पड़ा हुआ... मानो गहरी नींद में हो। लेकिन एलन कुर्दी सो नहीं रहा था, वो एक ऐसा मासूम था जो युद्ध और लाचारी के बीच बहकर मौत की आगोश में चला गया।एलन कुर्दी सीरिया में चल रहे भीषण गृह युद्ध का शिकार हो गया था। जब भी इस तस्वीर को कोई देखता है तो कहता है कि दुनिया भर में इंसानियत असफल हो गई है।
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