Reverse Culture Shock: यूरोप में 5 साल, भारत लौटे तो लगा झटका! 4 साल बाद भी देश में एडजस्ट नहीं कर पा रहा मुंबई का युवक

Published : May 19, 2026, 12:30 PM IST
Reverse Culture Shock: यूरोप में 5 साल, भारत लौटे तो लगा झटका! 4 साल बाद भी देश में एडजस्ट नहीं कर पा रहा मुंबई का युवक

सार

यूरोप में 5 साल बिताकर लौटे करण पंजाबी ने भारत में एडजस्ट करने की अपनी मुश्किल साझा की। 4 साल बाद भी उन्हें मानसिक संघर्ष, निराशा और बेचैनी का सामना करना पड़ा। अब वे भारत में कुछ नया बनाने पर ध्यान केंद्रित कर राहत महसूस कर रहे हैं।

विदेश की आरामदायक और शांत ज़िंदगी जीने के बाद जब लोग भारत लौटते हैं, तो उन्हें अक्सर यहां के माहौल में एडजस्ट करने में दिक्कत होती है। कई लोग अपने ऐसे अनुभव शेयर भी करते हैं। ऐसी ही एक पोस्ट आजकल ध्यान खींच रही है। यह पोस्ट मुंबई के रहने वाले करण पंजाबी की है, जो 5 साल यूरोप में बिताने के बाद भारत लौटे हैं।

B to D स्टूडियो के फाउंडर करण बताते हैं कि देश वापस आए हुए लगभग 4 साल हो गए हैं, लेकिन आज भी वो यहां के माहौल से पूरी तरह तालमेल नहीं बिठा पाए हैं। करण ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'मैंने 4 साल फ्रांस में बिताए और फिर बार्सिलोना से मास्टर्स की डिग्री ली। करीब 4 साल पहले मैं मुंबई लौटा। मुझे यह मानने में इतना समय लग गया कि यह वापसी कितनी मुश्किल थी।'

करण कहते हैं कि जब वो वापस आए तो उनके आसपास सभी लोग खुश थे, लेकिन वो खुद एक बड़े मानसिक संघर्ष से गुज़र रहे थे। उन्हें उम्मीद थी कि घर लौटने पर सब कुछ पहले जैसा होगा, लेकिन इसके बजाय उन्हें निराशा और बेचैनी का सामना करना पड़ा।

घर लौटकर परिवार के साथ रहना शुरू करने पर उन्हें लगा जैसे उनकी आज़ादी छिन गई हो। करण कहते हैं, 'अकेले रहना आपको यह समझने में मदद करता है कि आप कौन हैं। लेकिन वापस लौटना आपको यह एहसास दिलाता है कि आप कितना बदल गए हैं।' उनका कहना है कि विदेश में रहने से उनमें यह सोच नहीं आई कि वो दूसरों से बेहतर हैं, बल्कि यह एहसास हुआ कि वो अब दूसरों से 'अलग' हो गए हैं। करण कहते हैं कि सबसे दुख की बात यह जानना है कि विदेश में बिताया वो दौर अब कभी वापस नहीं आएगा।

 

 

करण ने बताया कि यूरोप में रहते हुए उन्हें नई जगहें खोजने और नए लोगों से मिलने का मौका मिलता था। लेकिन भारत में उन्हें ऐसा कोई मौका नहीं मिलता और यहां के दिन उबाऊ और एक जैसे लगते हैं। हालांकि, कुछ समय बाद करण अपनी इस सोच को बदलने में कामयाब रहे। वो कहते हैं कि अब उन्हें थोड़ी राहत महसूस हो रही है, क्योंकि उन्होंने जो खो दिया उस पर दुखी होने के बजाय यह सोचना शुरू कर दिया है कि वह भारत में क्या नया बना सकते हैं।

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