लाइफस्टाइल डेस्क : 26 जनवरी को देश संविधान लागू होने की 74वीं वर्षगांठ मना रहा है। ऐसे में गणतंत्र दिवस के मौके पर आपको बताते हैं आजादी की लड़ाई में योगदान देने वाले स्वतंत्रता सेनानियों के ऐसे 10 नारों के बारे में जो आज भी रग-रग में जोश भर देते हैं.
अगर आपके पास शक्ति की कमी है तो विश्वास किसी काम का नहीं। क्योंकि महान उद्देश्यों की पूर्ति के लिए, शक्ति और विश्वास दोनों का होना जरूरी है- सरदार वल्लभ भाई पटेल
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करो या मरो- मोहनदास करमचंद गांधी यह प्रसिद्ध नारा है देश के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने दिया था।
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सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है जोर कितना बाजू-ए-कातिल में है- रामप्रसाद बिस्मिल
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कमजोर कभी माफ नहीं करते, क्षमा करना ताकतवर लोगों की विशेषता है- मोहनदास करमचंद गांधी
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मेरे शरीर पर पड़ी एक-एक चोट ब्रिटिश साम्राज्य के ताबूत की कील बनेगी- लाला लाजपत राय
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छुआछूत हमारे देश और समाज के माथे पर कलंक है। हिंदू समाज के, धर्म के, राष्ट्र के करोड़ों हिंदू बंधु इससे अभिशप्त हैं। जब तक हम ऐसे हैं, तब तक हमारे शत्रु हमें परस्पर लड़वार विभाजन करने में सफल होते रहेंगे। इस घातक बुराई को हमें त्यागना होगा। भाग्य में नहीं अपनी क्षमता में विश्वास रखो- डॉ. भीमराव अंबेडकर
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वे मुझे मार सकते हैं लेकिन मेरे विचारों को नहीं, वे मेरे शरीर को कुचल सकते हैं लेकिन मेरी आत्मा को कुचलने में वे सक्षम नहीं- भगत सिंह
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स्वराज हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है, और हम इसे लेकर रहेंगे- लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक
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अब भी जिसका खून न खौला, खून नहीं वो पानी है, जो जान देश के काम न आए, वो बेकार जवानी है- चंद्रशेखर आजाद
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एक सैनिक के रूप में आपको हमेशा तीन आदर्शों को संजोना और उन पर जीना होगा: सच्चाई, कर्तव्य और बलिदान। जो सिपाही हमेशा अपने देश के प्रति वफादार रहता है, जो हमेशा अपना जीवन बलिदान करने को तैयार रहता है, वो अजेय है। अगर तुम भी अजेय बनना चाहते हो तो इन तीन आदर्शों को अपने हृदय में समाहित कर लो- सुभाष चंद्र बोस
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