आलिया भट्ट ने खोला राज: क्यों नहीं करतीं बेटी को तैयार, हर पैरेंट ले सकते हैं माडर्न पैरेंटिंग टिप्स

Published : Feb 21, 2026, 10:51 AM IST

Alia Bhatt Parenting Tips: आलिया भट्ट ने हाल ही में खुलासा किया कि वो अपनी बेटी को तैयार नहीं करती हैं। उनका काम उसे लेकर कुछ और है। तो चलिए बताते हैं, अदाकारा अपनी जान से प्यारी बेटी राहा को क्यों नहीं तैयार करती है। 

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आलिया भट्ट कई इंटरव्यू में अपनी बेटी राहा को लेकर जिम्मेदारी का जिक्र कर चुकी हैं। कैसे वो शूटिंग के बाद घर भागती हैं, ताकि राहा तो गले लगा सकें। उनकी और रणबीर कपूर की दुनिया राहा के इर्द-गिर्द ही घूमती है। लेकिन हाल ही में उन्होंने यह कहकर चौंका दिया कि वो राहा को ड्रेसअप नहीं करती हैं। जबकि हमारे समाज में मां की जिम्मेदारी बेटी को तैयार करने की होती है।

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रणबीर राहा को करते हैं तैयार

दरअसल, इसकी वजह कोई सख्ती नहीं बल्कि एक प्यारी-सी पारिवारिक समझ है। आलिया ने बताया कि Raha को तैयार करने की जिम्मेदारी रणबीर ने खुद ले रखी है। उन्हें अपनी बेटी के लिए कपड़े चुनना बेहद पसंद है। हर आउटफिट को वे खास अंदाज में स्टाइल करते हैं और यह उनके लिए एक खास फादर-डॉटर मोमेंट बन जाता है।

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घर में बंटी हुई जिम्मेदारियां

आलिया जहां राहा की देखभाल, खिलाने-पिलाने और सुलाने जैसी जिम्मेदारियां निभाती हैं, वहीं रणबीर उसे हंसाने, नए-नए गेम्स खेलने और मजेदार चेहरे बनाकर एंटरटेन करने का काम संभालते हैं। इस तरह दोनों ने अपनी सुविधा और पसंद के हिसाब से पैरेंटिंग रोल्स बांट रखे हैं।

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मॉडर्न पैरेंटिंग की मिसाल

उनकी ये बातें दिखाती हैं कि आज के दौर में पैरेंटिंग सिर्फ मां की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि मां-बाप दोनों की साझी भूमिका है। आपसी भरोसा और समझ से घर का माहौल खुशहाल और बैलेंस बनाता है। वर्कलाइफ चाहें जितनी मुश्किल हो, लेकिन घर में बच्चे की जिम्मेदारी माता-पिता दोनों को निभानी चाहिए,ताकि बच्चे को एक बैलेंस माहौल मिल सके।

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पैरेंटिंग टिप्स

पैरेंटिंग सिर्फ बच्चे की परवरिश नहीं, बल्कि उसे प्यार, सुरक्षा, संस्कार और आत्मविश्वास देने की एक कंटीन्यूअस प्रोसेस है। इसमें मां-बाप दोनों की बराबर भूमिका होती है, जहां एक ओर इमोशनल सपोर्ट  और देखभाल जरूरी है, वहीं अनुशासन, मार्गदर्शन और पॉजिटिव एग्जांपल भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। आधुनिक दौर में पैरेंटिंग का मतलब है बच्चे की भावनाओं को समझना, उसकी बात सुनना और उसे अपनी पहचान बनाने के लिए प्रोत्साहित करना है।

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