
रिलेशनशिप डेस्क: हिंदू धर्म में एक कहावत है - जन्म, मृत्यु, विवाह - इन तीन चीजों के बारे में कोई कुछ नहीं कह सकता। हिंदू धर्म के अनुसार, पति-पत्नी का रिश्ता विधाता तय करते हैं। स्वर्ग से ही बनकर आता है ये सात जन्मों का रिश्ता। लेकिन पति या पत्नी में से कौन पहले मरेगा, और कौन अकेला रह जाएगा? ये सवाल बना रहता है। आइए देखते हैं कि इस सवाल का जवाब कैसे मिल सकता है।
पति-पत्नी में किसकी मृत्यु पहले होगी? इस सवाल का जवाब कैसे मिलेगा? इसी पर चर्चा शुरू हो गई है। एक लोककथा के अनुसार, यह पता लगाया जा सकता है। लोककथा के अनुसार, ‘अक्षर में दो गुणा, दास गुण मात्रा नाम से नाम मिलाकर, 3 से हरी, आन मरा-बचा जान, शून्य रहे तो पति मरे, दो रहे तो युवती मरे।’
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इसका मतलब हम आपको बताएंगे, कैसे इसकी गणना करें, इसे उदाहरण से समझाएंगे। अगर पति का नाम भगवान है, तो इसके अक्षरों की संख्या 4 है। पत्नी का नाम अगर चाँद है, तो अक्षरों की संख्या 2 है। कुल 6 संख्या। अगर इसे जोड़ा जाए तो होगा: 6 + 6 = 12
पति के नाम के एकमात्र अक्षर की मात्रा 1, पत्नी के नाम के एकमात्र अक्षर की मात्रा 1. कुल संख्या 2. अगर इसे गुणा किया जाए तो 2 + 4 = 8
दोनों के अक्षर दोगुने 12 + 8 = 20. 3 से भाग करने पर 20 / 3 = भागफल 6 और शेष 2. इस हिसाब से पत्नी की मृत्यु पहले होगी।
विशेष ध्यान दें: यह एक लोककथा का हिसाब है। लेकिन यह हिसाब हमेशा सच होगा या वास्तविक होगा, ऐसा नहीं है। मनुष्य के जीने या मरने पर किसी का हाथ नहीं होता। सब कुछ मनुष्य का भाग्य होता है।
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