ऑफिस में लोग परेशान करते हैं, क्या करूं? प्रेमानंद जी महाराज ने बताया सही रास्ता

Published : Nov 29, 2025, 10:17 PM IST
 Premanand Ji Maharaj

सार

 Premanand Ji Maharaj: अक्सर ऑफिस में कर्मचारी को बॉस की डांट सुननी पड़ती है। कई बार उसे अपमान का भी सामना करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में क्या करना चाहिए, एक महिला इससे संबंधित सवाल पूछा। जिसका उत्तर प्रेमानंद जी महाराज ने बहुत ही सरल तरीके से दिया।

How To Handle Office Pressure: कई बार ऑफिस में कर्मचारियों, खासकर महिलाओं को परेशान किया जाता है। छोटी-छोटी बातों पर उन्हें अपमानित किया जाता है, जिसकी वजह से वे चाहकर भी नौकरी नहीं कर पातीं और प्रेशर झेल न पाने के कारण जॉब छोड़ने पर मजबूर हो जाती हैं। लेकिन क्या जॉब छोड़ देना या चुपचाप घुटते रहना ही इसका हल है? इसी मुद्दे पर एक महिला ने वृंदावन के प्रेमानंद जी महाराज से सवाल पूछा। आइए जानते हैं महिला ने क्या पूछा और महाराज जी ने क्या जवाब दिया।

महिला का सवाल

ऑफिस में अपमान होता है, अह्वेलना होता है, तिस्कार होता है, निंदा होती है, उपहास होता है। ऐसे में कार्य करना महाराज जी कठिन हो जाता है। ऐसी स्थिति में क्या करूं?

प्रेमानंद जी महाराज का जवाब

नहीं, ऐसी स्थिति में भी उत्साह के साथ काम करना चाहिए। अगर गलती है तो उसे सुधार लो, और अगर गलती नहीं है तो बेपरवाह होकर मस्त रहो। दूसरों की बातों में नहीं आना चाहिए।

महिला का सवाल: कभी-कभी सहन नहीं होता है?

प्रेमानंद जी महाराज का जवाब

प्रेमानंद जी महाराज (Premanand Ji Maharaj) जी ने कहा कि  नाम जप करो, इससे सहनशीलता बढ़ती है। जीवन में हमें सहन करना ही पड़ता है। जो सहन कर लेता है, वही महात्मा या संत बनता है। भगवान ने परिस्थितियों को बदलने के लिए नहीं, बल्कि उनमें हमारे हृदय को परिपक्व करने के लिए बनाया है। हमें परिस्थितियों को बदलने की मांग नहीं करनी चाहिए, बल्कि उनका डटकर सामना करना चाहिए। हम भागकर कहां जाएंगे? 

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भगवान ने जिस परिस्थिति में रखा है, उसमें खुद को मजबूत करें

जहां भी जाएंगे, माया तो साथ ही मिलेगी। भगवान ने हमें जिस स्थिति में रखा है, सोच-समझकर रखा है। हमें मजबूत बनना है, कमजोर नहीं। सहनशील बनना है। जब आप सहन करना सीख जाते हैं, तो बुरा लगना बंद हो जाता है। अहंकार नाम जप से खत्म हो जाए और बुरा तभी लगता है, जब आपके अंदर अहंकार होता है।  अगर कोई निंदा करे या अपमान करे, तो मुस्कुराकर आगे बढ़ जाना चाहिए। बुरा नहीं मानना चाहिए। यह शक्ति भजन और नाम जप करने से आती है।

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