'पत्नी पर्दा नहीं करती, अकेले बाहर जाती है-तलाक चाहिए', जज साहब ने खोल दी पति की आंख

Published : Aug 06, 2025, 10:58 AM IST
Divorce

सार

Allahabad High Court: तलाक के एक मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि पत्नी का पर्दा न करना या खुद फैसले लेना 'क्रूरता' नहीं माना जा सकता। परंपरा की दलील को खारिज कर कोर्ट ने समाज के लिए एक नई मिसाल पेश की। 

Divorce Case: शादी के बाद एक बच्चा हुआ, लेकिन फिर देव और दिव्या (बदले हुए नाम) की राहें जुदा हो गईं। दोनों पिछले 23 साल से बिना तलाक के अलग रह रहे थे। तलाक की अर्जी कोर्ट में लंबित थी और देव अपनी पत्नी दिव्या से तलाक चाहता था। लेकिन जब उसने तलाक की जो वजह बताई, उसे सुनकर कोर्ट भी हैरान और नाराज हुआ। देव ने कहा कि उसकी पत्नी अकेले बाहर जाती है और पर्दा नहीं करती। इस पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा कि यह आरोप ‘क्रूरता’ की श्रेणी में नहीं आता। आइए जानते हैं पूरी कहानी।

23 साल से पति-पत्नी रह रहे हैं अलग

देव (बदला हुआ नाम), जो पेशे से इंजीनियर हैं, और दिव्या (बदला हुआ नाम), जो एक सरकारी शिक्षिका हैं, शादी के कुछ साल बाद अलग हो गए थे। देव ने अदालत में तलाक की याचिका दायर करते हुए दो आधार पेश किए थे। पहला, कि उनकी पत्नी स्वतंत्र विचारों की है और बिना अनुमति के अपनी मर्जी से बाजार या अन्य जगहों पर चली जाती है। इसके साथ ही ये भी कोर्ट में कहा कि वह पर्दा नहीं करती है। दूसरा आधार यह रखा गया कि वह और उसकी पत्नी पिछले 23 साल से अलग रह रहे हैं और इस दौरान उनके बीच किसी भी प्रकार का संबंध नहीं रहा।

'पत्नी का लंबे समय तक दूर रहना मानसिक क्रूरता माना जा सकता है'

इलाहाबाद हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति दोनाडी रमेश की पीठ ने इस याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने देव की दलीलों पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पत्नी का पर्दा न करना या स्वतंत्र रूप से कहीं आना-जाना 'मानसिक क्रूरता' या 'परित्याग' का आधार नहीं बन सकता।पीठ ने स्पष्ट किया कि अगर पत्नी स्वतंत्र रूप से काम करती है और किसी अन्य व्यक्ति के साथ अवैध या अनैतिक संबंध बनाए बिना यात्रा करती है, तो इसे क्रूरता नहीं माना जा सकता। हालांकि, कोर्ट ने पति को एक आधार पर राहत दी-पत्नी द्वारा लंबे समय तक जानबूझकर पति से दूरी बनाकर रखना मानसिक क्रूरता के तहत आ सकता है। इसी आधार पर कोर्ट ने पति को तलाक की अनुमति दे दी।चूंकि दोनों पक्ष आर्थिक रूप से सक्षम हैं, इसलिए अदालत ने किसी भी प्रकार के स्थायी गुजारा भत्ते का आदेश नहीं दिया। कोर्ट का यह फैसला जनवरी 2025 को आया था।

शादी के कुछ साल बाद ही अलग हुए पति-पत्नी

देव और दिव्या की शादी 26 फरवरी 1990 को हुई थी। शादी के बाद दिव्या कुछ समय मायके में ही रहीं, क्योंकि उनके यहां गौना की रस्म होती है। 4 दिसंबर 1992 को गौना (पति-पत्नी को लेने आता है और फिर विदाई की रस्म होती है)  हुआ, और 2 दिसंबर 1995 को उनके यहां बेटे का जन्म हुआ। इसके कुछ समय बाद ही दोनों के रिश्तों में खटास आ गई और वे धीरे-धीरे पूरी तरह अलग हो गए। लगभग 23 साल से दोनों एक साथ नहीं रह रहे थे। उनका बेटा अब बालिग है और मां के साथ रहता है।

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फॉलो-अप प्रश्न और उनके उत्तर

प्रश्न : क्या पत्नी का पराए मर्द से दोस्ती तलाक का आधार बन सकता है?

उत्तर: नहीं, यदि पत्नी का पराए पुरुष के साथ केवल दोस्ताना संबंध है और कोई शारीरिक या अनैतिक संबंध नहीं है, तो यह तलाक का आधार नहीं माना जा सकता।

प्रश्न : क्या कमाने वाली पत्नी भी गुजारा भत्ता मांग सकती है?

उत्तर: हां, यदि पत्नी की आय इतनी नहीं है कि वह अपना पर्याप्त भरण-पोषण खुद कर सके, तो वह गुजारा भत्ता की हकदार हो सकती है। लेकिन यदि पति और पत्नी की कमाई समान है, तो पत्नी गुजारा भत्ता नहीं मांग सकती।

प्रश्न : क्या पति भी गुजारा भत्ता मांग सकता है?

उत्तर: हां, हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 24 और 25 के तहत पति और पत्नी दोनों गुजारा भत्ता मांग सकते हैं। यदि पति यह साबित कर सके कि वह आर्थिक रूप से कमजोर है और पत्नी उससे अधिक कमाती है, तो वह भी गुजारा भत्ता का दावा कर सकता है।

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