
Divorce Case: पति-पत्नी के तलाक मामलों में अक्सर देखा जाता है कि पत्नी गुजारा भत्ता मांगती है और कोर्ट उसे मंजूरी भी दे देता है। लेकिन इस बार मद्रास हाईकोर्ट ने एक अलग ही मिसाल कायम की है। यहां एक डॉक्टर पत्नी, जिसकी सालाना आमदनी करीब 16 लाख रुपये है और जिसके पास करोड़ों की संपत्ति भी है, ने पति से अंतरिम भत्ता (maintenance) मांगा। फैमिली कोर्ट ने उसे 30,000 रुपये प्रति महीना दिलवा भी दिए थे। लेकिन पत्नी जब इससे ज्यादा की मांग की तो पति ने हाईकोर्ट में गुहार लगाई। जिस पर हाईकोर्ट ने कमाने वाली महिला को आइना दिखाते हुए कुछ अहम बातें कहीं। तो चलिए पूरी कहानी प्वाइंट वाइज बताते हैं।
22 अगस्त 2025 को मद्रास हाईकोर्ट ने पत्नी की गुजारा भत्ते की मांग को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि पत्नी पहले ही पर्याप्त आमदनी और संपत्ति की मालिक है, इसलिए उसे ज्यादा रकम देने का कोई औचित्य नहीं हैं। वहीं, पति पहले से ही बेटे की शिक्षा और देखभाल का खर्च उठा रहा है। दरअसल, गुजारा भत्ता बढ़ाने के लिए याचिका दायर करने वाली महिला एक डॉक्टर है और कंपनी की डायरेक्टर भी है। सालाना आदमनी 16 लाख रुपए है। उसने पिछले तीन वित्तीय वर्षों (2021-2024) में लगभग 47 लाख रुपये की डिविडेंड इनकम अर्जित की। इतना ही नहीं उसके पास करीब 32 सेंट (0.31 एकड़) जमीन भी है, जिसकी कीमत करोड़ों में बताई गई। मतलब महिला पूरी तरह से आत्मनिर्भर है। हाईकोर्ट के खुद पत्नी के वकीलों ने माना कि यह आमदनी उसे मिली है।
केस की शुरुआत साल 2019 से होती है। पति-पत्नी ने आपसी मतभेदों के चलते तलाक का केस चेन्नई की फैमिली कोर्ट में दायर किया। 2021 में फैमिली कोर्ट ने आदेश दिया कि बेटे की पढ़ाई और कोचिंग (NEET फीस सहित) का खर्च पति उठाए। साल 2023 में फैमिली कोर्ट ने अंतरिम आदेश में पति को पत्नी और बेटे दोनों को 30,000 रुपये हर महीने देने को कहा। साल 2023 में पत्नी ने इस आदेश को चुनौती देते हुए गुजारा भत्ता बढ़ाने के लिए मद्रास हाईकोर्ट का रुख किया। कोर्ट ने पूरे मामले को ध्यान में रखते हुए पत्नी का याचिका 22 अगस्त 2025 को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि आपके पास पहले से ही पर्याप्त आमदनी और संपत्ति है।
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न्यायमूर्ति पी.बी. बालाजी ने कहा,'हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 24 के तहत अंतरिम गुज़ारा भत्ता सिर्फ उस स्थिति में दिया जाता है, जब पत्नी के पास अपनी बुनियादी जरूरतें पूरी करने लायक आमदनी न हो। इस केस में पत्नी के पास पहले से पर्याप्त आमदनी और संपत्ति है। पति बेटे की शिक्षा का पूरा खर्च उठा रहा है और 30,000 रुपये प्रति माह बच्चे के लिए भी दे रहा है। इसलिए पत्नी को अलग से अंतरिम भत्ता देने की जरूरत नहीं है।
हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट द्वारा पत्नी को दिए गए 30,000 रुपये के अंतरिम भत्ते को रद्द कर दिया। हालांकि, बेटे को दिए जा रहे 30,000 रुपये प्रतिमाह और शिक्षा का खर्च जारी रहेगा।
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