High Court: जयपुर हाईकोर्ट ने हाल ही में एक बड़ा फैसला सुनाते हुए 12 साल पुरानी शादी को अमान्य घोषित कर दिया। पति का आरोप था कि शादी से पहले पत्नी की बीमारी की जानकारी छिपाई गई, जो उसके मुताबिक धोखाधड़ी है। आइए जानते हैं इस मामले की पूरी कहानी।

Rajasthan Marriage Fraud Case: शादी की पहली शर्त होती है कि एक-दूसरे से कोई राज न छुपाया जाए, खासकर अगर वह किसी मेडिकल कंडिशन से जुड़ा हो। क्योंकि आगे चलकर यह रिश्ते के टूटने का कारण बन सकता है। राजस्थान से आए एक मामले में भी ऐसा ही हुआ। चित्तौड़गढ़ के एक शख्स की शादी 29 अप्रैल 2013 को हुई थी, जिसे राजस्थान हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया। इसकी वजह थी पत्नी की बीमारी, जिसे शादी से पहले छुपाया गया था। आइए बताते हैं पूरा मामला और हाईकोर्ट के फैसले के बारे में।

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पति को पत्नी के बीमारी के बारे में कैसे चला पता?

चित्तौड़गढ़ के रहने वाले एक शख्स की शादी साल 2013 में कोटा की एक महिला से हुई थी। उस समय उसे यह पता नहीं था कि जिस महिला से वह शादी कर रहा है, वह गंभीर बीमारी से पीड़ित है। शादी के कुछ दिन बाद पति ने पत्नी के व्यवहार में असामान्य बदलाव देखे-जैसे बातचीत में जुबान लड़खड़ाना, मतिभ्रम होना और हाथ कांपना जैसे शारीरिक लक्षण। पत्नी की चिंता होने लगी तो एक दिन पति को उसके सामान में डॉक्टर की पर्ची मिली, जिसमें सिजोफ्रेनिया (Schizophrenia) के इलाज का जिक्र था। यह बीमारी पत्नी को शादी से पहले ही थी, लेकिन इसके बारे में पति को नहीं बताया गया था। पत्नी और उसके परिवार से मिले इस धोखे से दुखी होकर शख्स ने शादी को अमान्य घोषित करने के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

पत्नी से अलग होने के लिए पति ने क्या कदम उठाया?

पति ने कोटा के परिवार न्यायालय में शादी को अमान्य करने की याचिका दायर की थी, जिसे 28 अगस्त 2019 को खारिज कर दिया गया था। इसके बाद शख्स ने राजस्थान हाईकोर्ट में अपील की। हाईकोर्ट में पति के वकील ने कहा कि पत्नी की बीमारी ने वैवाहिक जीवन को असंभव बना दिया और इस तत्थ को जाबूझकर छिपाया गया, जो धोखाधड़ी है। वहीं पति ने भी कोर्ट में दावा किया कि पत्नी का व्यवहार अजीब और अस्वीकार्य था।

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हाईकोर्ट ने इस अधिनियम के तहत विवाह को रद्द कर दिया

राजस्थान हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद 12 साल पुरानी शादी को अमान्य घोषित कर दिया। कोर्ट ने पाया का पत्नी ने शादी से पहले अपनी गंभीर मानसिक बीमारी सिजोफ्रेनिया के बारे में पति और उसके परिवार से छिपाया, जो हिंदू विवाह अधिनियम 1955 की धारा 12(1)(c) के तहत धोखाधड़ी माना गया है। जस्टिस इंद्रजीत सिंह और जस्टिस आनंद शर्मा की खंडपीठ ने पति को राहत देते हुए शादी को रद्द कर दिया।

रिश्ते की बुनियाद- पारदर्शिता और ईमानदारी

एक स्वस्थ, प्यार भरा संबंध वही होता है जहां दोनों साथी अपनी महत्वपूर्ण जानकारियों में पारदर्शी हों- चाहे वो स्वास्थ्य संबंधी हो या अन्य कोई व्यक्तिगत जानकारी। छुपी जानकारी से, संबंध में विश्वास खो जाता है और उसकी बुनियाद कमजोर हो जाती है।

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