आज भारत में कई हिल स्टेशन हैं, जहां लोग गर्मी से राहत पाने और प्रकृति के करीब जाने के लिए जाते हैं। कई लोग हिल स्टेशन खूब जाते हैं। लेकिन उन्हें नहीं पता कि भारत का पहला हिल स्टेशन कौन सा है? अगर आप भी उन्हीं लोगों में से एक हैं, तो यह लेख आपके लिए है। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि भारत का पहला हिल स्टेशन कौन सा है और अंग्रेजों ने इसकी खोज क्यों और कैसे की।
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ये है भारत का पहला हिल स्टेशन
हम बात कर रहे हैं मसूरी की, जिसे 'पहाड़ों की रानी' भी कहा जाता है। यह वही जगह है जिसकी खोज 19वीं सदी की शुरुआत में अंग्रेजों ने की थी और जिसे वे अपनी गर्मियों की छुट्टियों और सुकून के पलों के लिए बेस्ट जगह मानते थे।
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कैसे हुई मसूरी की खोज?
मसूरी की खोज का श्रेय एक ब्रिटिश सैन्य अधिकारी कैप्टन यंग को जाता है। साल 1820 की बात है, जब कैप्टन यंग और एफ.जे. शोर (जिन्होंने बाद में सहारनपुर में अधीक्षक के रूप में काम किया) इस इलाके की खूबसूरती से मंत्रमुग्ध हो गए थे। उन्होंने यहां एक छोटी सी झोपड़ी बनाई और गर्मियों से बचने के लिए यहां आना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे अन्य ब्रिटिश अधिकारी और व्यापारी भी यहां आने लगे और मसूरी एक लोकप्रिय हिल स्टेशन बन गया।
ब्रिटिश काल के दौरान मसूरी में कई स्कूल, चर्च, क्लब और पुस्तकालय स्थापित किए गए थे जो आज भी अपनी ऐतिहासिक विरासत को संजोए हुए हैं। मसूरी के मशहूर लाल टिब्बा, कैमल्स बैक रोड, गन हिल और मसूरी लाइब्रेरी आज भी उस दौर की यादें ताज़ा कर देते हैं। ब्रिटिश काल से ही यहां वेलहम गर्ल्स स्कूल, वुडस्टॉक स्कूल और ओक ग्रोव स्कूल जैसे कई प्रतिष्ठित स्कूल भी चल रहे हैं।
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मसूरी आज भी उतना ही खास है
मसूरी आज भी उत्तर भारत के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में से एक है। हर साल लाखों पर्यटक यहां आते हैं। कुछ पहाड़ों की ठंडक का लुत्फ़ उठाने, कुछ ट्रैकिंग और रोमांच के लिए तो कुछ बस शांति और सुकून के पल बिताने के लिए। यहां का मॉल रोड, केम्प्टी फॉल्स, गन हिल और जॉर्ज एवरेस्ट हाउस देखने लायक हैं।
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