Gehun Ki Sabse Jyada Paidawar Dene Wali Kism: गेहूं की सबसे ज्यादा पैदावार देने वाली किस्म का चयन आपके एरिया और खेती की परिस्थितियों पर निर्भर करता है। वहीं, यूरिया का प्रयोग एक साथ करने की बजाय 2–3 किस्तों में करना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है।
गेहूं की कौन-सी किस्म देती है सबसे ज्यादा पैदावार? जानिए यूरिया डालने का सही समय
भारत में गेहूं रबी सीजन की सबसे महत्वपूर्ण फसलों में से एक है। अच्छी पैदावार के लिए सिर्फ उन्नत बीज खरीदना ही काफी नहीं होता, बल्कि सही किस्म का चयन, समय पर बुवाई, संतुलित उर्वरक प्रबंधन और सिंचाई भी उतनी ही जरूरी होती है। अक्सर किसान यह सवाल पूछते हैं कि सबसे ज्यादा पैदावार देने वाली गेहूं की किस्म कौन-सी है और इसमें यूरिया कितनी बार डालना चाहिए। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार इसका एक ही जवाब सभी किसानों पर लागू नहीं होता, क्योंकि गेहूं की सबसे अच्छी किस्म क्षेत्र, मिट्टी, सिंचाई की अवेलेबिटी और बुवाई के समय पर निर्भर करती है। इसलिए हमेशा अपने कृषि-जलवायु क्षेत्र के अनुसार किस्म का चयन करना चाहिए।
25
सबसे ज्यादा पैदावार देने वाली गेहूं की किस्में
DBW-303 (करण वैष्णवी): यह वर्तमान समय की सबसे ज्यादा फेमस हाई-यील्डिंग किस्मों में से एक है। अनुकूल परिस्थितियों में इसकी औसत उपज लगभग 80 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पहुंच सकती है, जबकि अच्छी खेती मैनेजमेंट के साथ इससे ज्यादा प्रोडक्शन की भी संभावना रहती है। यह किस्म रोग प्रतिरोधक क्षमता और बेहतर दाने की क्वालिटी के लिए भी जानी जाती है।
HD-2967: यह भारत की सबसे लोकप्रिय गेहूं किस्मों में शामिल रही है। लंबे समय तक इसने देश के कुल गेहूं उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इसकी अच्छी उपज और विभिन्न क्षेत्रों में अनुकूल प्रदर्शन के कारण किसान आज भी इसे पसंद करते हैं।
35
गेहूं की ज्यादा पैदावार देने वाली किस्में
DBW-187: यह जैव-संवर्धित (बायोफोर्टिफाइड) किस्म है, जिसमें आयरन की मात्रा अधिक होती है। सिंचित क्षेत्रों में यह भी अच्छी पैदावार देती है और कई राज्यों के लिए अनुशंसित है।
HD-3226: अगर समय पर बुवाई की गई है और सिंचाई की अच्छी सुविधा अवेलेबल है, तो HD-3226 भी बेहतर उत्पादन देने वाली किस्म मानी जाती है। इसमें प्रमुख रोगों के प्रति अच्छी सहनशीलता भी पाई जाती है।
ध्यान दें मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में अलग-अलग किस्मों की सिफारिश की जाती है। इसलिए बीज खरीदने से पहले अपने जिले के कृषि विभाग या कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) से सलाह अवश्य लें।
45
गेहूं में यूरिया कितनी बार डालना चाहिए?
यूरिया का यूज खेत की मिट्टी, मिट्टी परीक्षण और सिंचाई की सुविधा पर निर्भर करता है। सामान्य सिंचित खेती में कृषि वैज्ञानिक यूरिया को एक साथ डालने की बजाय 3 भागों में देने की सलाह देते हैं, ताकि पौधों को नाइट्रोजन सही समय पर मिलती रहे और उर्वरक की बर्बादी भी कम हो।
पहली बार : बुवाई के समय कुल नाइट्रोजन की लगभग एक-तिहाई मात्रा बेसल डोज के रूप में डालें। इसके साथ फॉस्फोरस और पोटाश की पूरी मात्रा भी मिलाई जाती है।
दूसरी बार: पहली सिंचाई (आमतौर पर 20–25 दिन बाद, क्राउन रूट इनिशिएशन अवस्था) से ठीक पहले या सिंचाई के समय यूरिया की दूसरी किस्त दें। यह अवस्था अधिक कल्ले बनने के लिए सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है।
तीसरी बार: दूसरी सिंचाई (लगभग 40–45 दिन बाद) के समय बची हुई यूरिया दें। इससे बालियां अच्छी बनती हैं और दाने भरने में मदद मिलती है।
55
क्या पूरी यूरिया एक साथ डालनी चाहिए?
नहीं। पूरी यूरिया एक साथ डालने से उसका बड़ा हिस्सा पानी के साथ बह सकता है या हवा में नष्ट हो सकता है। इससे पौधों को पूरा लाभ नहीं मिलता और लागत भी बढ़ जाती है। इसलिए हमेशा डिवाइडेड मात्रा में यूरिया देना ज्यादा लाभदायक माना जाता है। ज्यादा पैदावार के लिए इन बातों का ध्यान रखें।
खेत की मिट्टी का परीक्षण जरूर कराएं।
प्रमाणित और उन्नत बीज का ही उपयोग करें।
समय पर बुवाई करें।
पहली सिंचाई में देरी न करें।
खरपतवार नियंत्रण समय पर करें।
रोग और कीट दिखाई देने पर तुरंत कृषि विशेषज्ञ से सलाह लें।
आवश्यकता अनुसार जिंक और सल्फर जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों का भी उपयोग करें।
Lifestyle News in Hindi (लाइफ स्टाइल न्यूज़): Read latest lifestyle news in Hindi, Fashion news in Hindi, Beauty tips, Relationship advice, Health tips, Travel news in Hindi online at Asianet News Hindi.