
लाइफस्टाइल डेस्क। पूरी दुनिया में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत महिलाओं के काम के घंटे कम करने और वेतन बढ़ाने के आंदोलन से हुई थी। दरअसल, पहले महिला मजदूरों को पुरुषों के मुकाबले ज्यादा घंटे काम करने पड़ते थे और उन्हें वेतन भी कम मिलता था। इसे लेकर उनमें असंतोष बढ़ता जा रहा था। धीरे-धीरे महिलाएं संगठित होने लगीं और उन्होंने काम के घंटे कम करने और वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन शुरू किया।
न्यूयॉर्क में निकाला मार्च
साल 1908 में महिला मजदूरों ने 8 मार्च को न्यूयॉर्क में रैली निकालकर काम के घंटे कम करने और वेतन बढ़ाने के लिए आंदोलन शुरू किया था। श्रमिक महिलाओं का यह आंदोलन सफल रहा। उके काम के घंटे कम करने और वेतन बढ़ाने के लिए फैक्ट्रियों के मालिक तैयार हो गए, क्योंकि आंदोलन काफी फैल चुका था। इसके एक साल बाद सोशलिस्ट पार्टी ऑफ अमेरिका ने इस दिन को राष्ट्रीय महिला दिवस घोषित किया।
रूस में भी हुआ संघर्ष
1917 में प्रथम विश्व युद्ध के समय रूस में श्रमिक महिलाओं ने रोटी और शांति के लिए हड़ताल की थी। हड़ताल के दौरान उन्होंने अपने पतियों पर भी यह दबाव डाला था कि वे युद्ध से अलग हो जाएं। इस आंदोलन का ऐसा असर पड़ा कि रूस के जार निकोलस को अपना पद छोड़ना पड़ा। महिलाओं को मतदान का अधिकार भी मिला। रूसी महिलाओं ने यह हड़ताल 28 फरवरी को की थी। यूरोप में दूसरे देशों में महिलाओं ने 8 मार्च को शांति का समर्थन करने के लिए रैलियां निकाली थीं। इसलिए आगे चल कर 8 मार्च को ही अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाने लगा।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का महत्व
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस महिलाओं के अधिकारों, समाज में उनकी समानता स्थापित करने के लिए चल रहे संघर्षों और अलग-अलग क्षेत्रों में महिलाओं के योगदान को मान्यता व महत्व देने के लिए मनाया जाता है। इस दिन समारोहों का आयोजन कर महिलाओं के अधिकारों को लेकर लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया जाता है। इसके अलावा, महिलाओं को भी उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए कार्यक्रम किए जाते हैं। यह दिवस दुनिया के हर देश में मनाया जाता है।
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