750 रुपए से नौकरी शुरू करने वाला क्लर्क निकला करोड़पति, आलीशान बंगला-लग्जरी कारें देख सबकी आंखें चकरा गईं

Published : Mar 09, 2022, 05:53 PM ISTUpdated : Mar 09, 2022, 06:49 PM IST
750 रुपए से नौकरी शुरू करने वाला क्लर्क निकला करोड़पति, आलीशान बंगला-लग्जरी कारें देख सबकी आंखें चकरा गईं

सार

मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर से 750 रुपए महीने की नौकरी शुरू करने वाला सरकारी क्लर्क ने इस तरह से काली कमाई कर डाली की वह करोड़पति बन गया। उसके घर से छापेमारी में करोड़ों की संपत्ति का खुलासा हुआ है। आलीशान बंगला, जमीन और लग्जरी कारों को देखकर पुलिस वाले भी हैरान रह गए।

उज्जैन (मध्य प्रदेश). एक तरफ जहां मध्य प्रदेश में बेरोजगार युवा रोजगार की तलाश में भटक रहे हैं। ताकि उनको कहीं तो कोई सरकारी नौकरी मिल जाए। लेकिन उनको कहीं कोई उम्मीद की किरण नहीं दिखाई दे रही है। वहीं दूसरी तरफ प्रदेश के उज्जैन शहर से 750 रुपए महीने की नौकरी शुरू करने वाला सरकारी क्लर्क ने इस तरह से काली कमाई कर डाली की वह करोड़पति बन गया। उसके घर से छापेमारी में करोड़ों की संपत्ति का खुलासा हुआ है। आलीशान बंगला, जमीन और लग्जरी कारों को देखकर पुलिस वाले भी हैरान रह गए।

क्लर्क की घर अचूक संपत्ति देख पुलिस के उड़े होश
दरअसल, बुधवार को उज्जैन में शिक्षा विभाग के एक लिपिक धर्मेंद्र चौहान के धक रक सुबह EOW ने कार्रवाई की। इस दौरान लिपिक के घर से मात्र 34 हजार की नकदी मिली। लेकिन जांच के दौरान आलीशान मकान, करोड़ों की जमीन, ट्रैक्टर, थ्रेशर मशीन, स्कार्पियों व स्विफ्ट कार के साथ यूको बैंक में लॉकर का जो रिकॉर्ड मिला वह हैरान करने वाला था। जांच एजेंसी शॉक्ड है कि एक लिपिक ने आखिर कैसे इनती संपत्ति बना ली।  

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26 साल की नौकरी वेतन में मिले कुल 35 लाख
बता दें कि शिक्षक ने महज अभी 26 साल की नौकरी की है, जिसमें उसे अब तक वेतन के रूप में 35 लाख रुपए मिले हैं। जबकि तलाशी में ही उसके पास से करोड़ों की चल अचल संपत्ति मिली है। बताया जा रहा है कि EOW को मिली जानकारी के अनुसार लिपिक धर्मेंद्र 2005 से 2010 तक जिला पंचायत में अध्यक्ष का PA रहा है। इसी दौरान उसने काली कमाई करके बेनामी संपत्ति बनाई है।

महज 750 रुपए से शुरू की थी नौकरी
जांच के दौरान EOW  टीम ने जब लिपित ता सर्विस रिकॉर्ड खंगाला तो पता चला धर्मेद्र को यह नौकरी अनुकंपा में मिली है। उसते पिता अंतर सिंह शिक्षक थे, लेकिन सर्विस के दौरान उनकी मौत हो गई। इसके बाद धर्मेंद्र की 1994 में यह नौकरी मिली। इस दौरान धर्मेंद का वेतन महज 750 रुपए महीना ही था। तब से अब तक उसे करीब 35 लाख रुपए वेतन मिला है। लेकिन जांच में जो खुलासा हुआ वो करोड़ों का है।  

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