
नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 73वें स्वतंत्रता दिवस पर अपने भाषण में सीडीएस का जिक्र किया। पीएम मोदी ने चीफ ऑफ डिफेंस यानि सीडीएस के गठन की घोषणा की। उन्होंने कहा- सीडीएस नियुक्ति से तीनों सेनाओं को प्रभावी नेतृत्व मिलेगा। बता दें, सीडीएस की मांग 11 साल पहले हो चुकी है। इस पद के गठन की मांग राज्यसभा के बीजेपी नेता राजीव चंद्रशेखर ने की थी। उस समय केंद्र में यूपीए की मनमोहन सरकार थी।
बीजेपी के सीनियर नेता राजीव चंद्रशेखर ने मार्च 2008 में राज्यसभा में सवाल पूछा था - 'क्या सरकार कारगिल कमिटी की रिपोर्ट के फोलोअप को प्रस्तावित करती है और सेना की सभी विंग्स में तालमेल के लिए सीडीएस के पद का गठन करेगी। सरकार इस संबंध में कब निर्णय लेगी।'
सांसद राजीव चंद्रशेखर के जवाब में तत्कालीन रक्षा मंत्री एके एंटनी कहा था - 'राष्ट्र सुरक्षा प्रणाली पर मिनिस्टर्स के ग्रुप की रिपोर्ट सरकार के सामने फरवरी 2001 को रखी गई थी। इसमें सीडीएस के पद के गठन की मांग की गई थी। सरकार ने रिपोर्ट की सभी सिफारिशों को स्वीकार कर लिया है। जिसपर सरकार इस संबंध में सभी राजीनितिक पार्टियों से राय लेगी। राजनीतिक दलों के साथ जल्द राय शुमारी की प्रक्रिया को मार्च 2006 में शुरू किया जाएगा। रक्षामंत्री ने सभी राजनीतिक दल के नेताओं को पत्र लिख दिया है। इस पत्र का जवाब पांच राजनीतिक दल के नेताओं ने दिया है। जल्द पार्टी के नेताओं को इस संबंध में याद दिलाया जाएगा।'
इससे पहले क्या होता था
अभी चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी (सीओएससी) होता है। चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी में सेना, नौसेना और वायुसेना प्रमुख रहते हैं। सबसे वरिष्ठ सदस्य को इसका चेयरमैन नियुक्त किया जाता है। यह पद सीनियर सदस्य को रोटेशन के आधार पर रिटायरमेंट तक दिया जाता है। लंबे समय से चीफ ऑफ डिफेंस बनाने की मांग हो रही थी। इससे पहले साल 1999 में कारगिल युद्ध में पाया कि तीनों सेनाओं के बीच तालमेल की कमी रह गई थी। इसके बाद देश में चीफ ऑफ स्टाफ का पद बनाया गया। इसका काम सिर्फ तीनों सेनाओं के बीच तालमेल बैठाना होता है। इसके बाद 2012 में नरेंद्र चंद्र कार्यदल ने इसके लिए एक पर्मानेंट पद चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ बनाने की मांग की थी।
आडवाणी की सदस्यता में बनी थी समिति
करगिल जंग में तीनों सेनाओं के बीच कॉर्डिनेश की जरूरत महसूस की गई थी। जिसको लेकर लालकृष्ण आडवाणी की अध्यक्षता में मंत्रियों की एक समिति बनी थी। तीनों सेनाओं के संयुक्त मुख्यालय और सीडीएस पद के लिए सिफारिश की गई। इस पर फैसला करीब 20 साल तक अटका रहा। पूर्व रक्षामंत्री रहे मनोहर पर्रिकर ने मजबूती से सीडीएस पद का समर्थन किया था।
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