
नई दिल्ली. निर्भया केस के चारों दोषियों की फांसी की तारीख को तीसरी बार भी टाल दिया गया। दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने 2 मार्च को डेथ वॉरंट को रद्द कर दिया। निर्भया के दोषी पवन ने दया याचिका लगाई थी। वकील ने कोर्ट में कहा कि दया याचिका पेंडिंग है, इसलिए फांसी नहीं दी जा सकती है। कोर्ट ने भी इस बात को माना और फांसी की तारीख को टाल दिया। नियम के तहत अगर राष्ट्रपति दया याचिका को खारिज कर दें, तब भी दोषी तो 14 दिन का वक्त दिया जाता है। इसके पीछे बड़ी वजह है।
शत्रुघ्र चौहान बनाम यूनियन ऑफ इंडिया केस है इसके पीछे की वजह
दया याचिका खारिज होने के बाद दोषियों को 14 दिन का वक्त देने के पीछे साल 2014 का शत्रुघ्र चौहान बनाम यूनियन ऑफ इंडिया मामला है। इस केस में फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिए थे कि मौत की सजा पाने वाले कैदी को फांसी के लिए मानसिक रूप से तैयार होने के लिए कम से कम 14 दिन का वक्त दिया जाए।
कब से जोड़ा जाता है 14 दिन का वक्त?
जब राष्ट्रपति दोषी की दया याचिका को खारिज करते हैं, तब से लेकर दोषी को 14 दिन का वक्त दिया जाता है। पवन की दया याचिका खारिज हो चुकी है। ऐसे में 2 मार्च से ही दोषी के लिए14 दिन का वक्त गिना जाएगा।
निर्भया केस में कितनी बार जारी हुआ डेथ वॉरंट
निर्भया केस में दोषियों के लिए 3 बार डेथ वॉरंट जारी हो चुका है। पहला डेथ वॉरंट 7 जनवरी को जारी हुआ, जिसके मुताबिक 22 जनवरी की सुबह 7 बजे फांसी दी जानी ती। दूसरा डेथ वॉरंट 17 जनवरी को जारी हुआ। इसके मुताबिक, 1 फरवरी की सुबह 6 बजे फांसी देना का आदेश था। 31 जनवरी को कोर्ट ने अनिश्चितकाल के लिए फांसी टाली दी। तीसरा डेथ वॉरंट 17 फरवरी को जारी हुआ। इसके मुताबिक 3 मार्च को सुबह 6 बजे फांसी का आदेश दिया गया था।
चलती बस में निर्भया से हुआ था गैंगरेप
दक्षिणी दिल्ली के मुनिरका बस स्टॉप पर 16-17 दिसंबर 2012 की रात पैरामेडिकल की छात्रा अपने दोस्त को साथ एक प्राइवेट बस में चढ़ी। उस वक्त पहले से ही ड्राइवर सहित 6 लोग बस में सवार थे। किसी बात पर छात्रा के दोस्त और बस के स्टाफ से विवाद हुआ, जिसके बाद चलती बस में छात्रा से गैंगरेप किया गया। लोहे की रॉड से क्रूरता की सारी हदें पार कर दी गईं। छात्रा के दोस्त को भी बेरहमी से पीटा गया।
निर्भया ने 13वें दिन सिंगापुर में दम तोड़ दिया था
चलती बस में रेप के बाद बलात्कारियों ने दोनों को (निर्भया और उसका दोस्त) महिपालपुर में सड़क किनारे फेंक दिया गया। पीड़िता का इलाज पहले सफदरजंग अस्पताल में चला, सुधार न होने पर सिंगापुर भेजा गया। घटना के 13वें दिन 29 दिसंबर 2012 को सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल में छात्रा की मौत हो गई।
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