सब्जी की टोकरी में छिपाते थे कैमरा...धारा-370 हटने के बाद कवरेज के लिए इन 3 फोटोग्राफरों को मिला अवार्ड

Published : May 05, 2020, 09:55 AM IST
सब्जी की टोकरी में छिपाते थे कैमरा...धारा-370 हटने के बाद कवरेज के लिए इन 3 फोटोग्राफरों को मिला अवार्ड

सार

जम्मू-कश्मीर से धारा- 370 हटाए जाने के वहां के हालातों का कवरेज करने वाले 3 फोटोग्राफर्स यासीन डार, मुख्तार खान और चन्नी आनंद न्यूज को कश्मीर कवरेज के लिए पत्रकारिता का प्रतिष्ठित पुलित्जर फीचर फोटोग्राफी अवॉर्ड दिया गया है। ये तीनों फोटोग्राफर न्यूज एजेंसी एपी के लिए काम करते हैं। 

न्यूयॉर्क. जम्मू- कश्मीर से अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद कर्फ्यू जैसे हालात रहें। इस दौरान भारत के 3 फोटो ग्राफर्स को कश्मीर कवरेज के लिए पत्रकारिता का प्रतिष्ठित पुलित्जर फीचर फोटोग्राफी अवॉर्ड दिया गया है। ये तीनों फोटोग्राफर यासीन डार, मुख्तार खान और चन्नी आनंद न्यूज एजेंसी एपी के लिए काम करते हैं। 

सब्जी की टोकरियों में कैमरे छिपा कर खींची तस्वीरें 

घाटी में विपरीत परिस्थितियों के बाद भी इन्होंने अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी अंजाम दिया। कई बार तो प्रदर्शनकारियों से बचने के लिए सब्जी की टोकरियों में कैमरे छिपाए। तीनों फोटोग्राफर ने प्रदर्शन, पुलिस-अर्धसैनिक बलों की कार्रवाई और लोगों की जिंदगी की तस्वीरें एजेंसी के दिल्ली ऑफिस तक पहुंचाईं।

दो फोटोग्राफर श्रीनगर में तो एक जम्मू में रहते हैं 

यासिन और मुख्तार श्रीनगर में रहते हैं, जबकि आनंद जम्मू जिले के निवासी हैं। चन्नू आनंद पिछले 20 सालों से एपी के साथ जुड़े हुए हैं। पुरस्कार जीतने पर बेहद खुश आनंद ने कहा, 'मैं आश्चर्यचकित हूं। मुझे तो विश्वास ही नहीं हो रहा है।' देर रात इन प्रतिष्ठित पुरस्कारों की घोषणा हुई। इन तीनों ने घाटी के सामान्य जनजीवन के साथ ही प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों की तस्वीरों को भी दुनिया तक पहुंचाया।

'दिल्ली फोटो पहुंचाने के लिए यात्रियों से करते थे विनती'

श्रीनगर में रहने वाले यासीन डार ने ईमेल के जरिए बताया कि यह काम बिल्कुल चूहे और बिल्ली की लुकाछिपी की तरह था। इंटरनेट बंद रहने से फोटो दिल्ली तक पहुंचाने में काफी मुश्किल होती थी। हम मेमोरी कार्ड से फोटो दिल्ली भेजने के लिए एयरपोर्ट पर दिल्ली जाने वाले किसी यात्री को मनाते थे। हमारे काम से यह प्रेरणा मिली है कि कभी किसी के सामने चुप्पी नहीं साधनी है। वहीं, जम्मू में रहने वाले चन्नी आनंद बताते हैं कि 20 साल एपी के साथ काम करने के बाद यह पुरस्कार मिला। इसकी खुशी जाहिर करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं।

इन्हें भी मिला पुरस्कार

'न्यूयॉर्क टाइम्स', 'एंकरेज डेली न्यूज', 'प्रो पब्लिका' को पुलित्जर पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। देर रात इन पुरस्कारों की घोषणा हुई। तीनों को अमेरिका में भ्रष्टाचार, लॉ इन्फोर्समेंट, यौन हिंसा और नस्लभेद जैसे विषयों पर पड़ताल करती रिपोर्ट्स के लिए पुरस्कार मिले। न्यूयॉर्क टाइम्स की झोली में 3 अवॉर्ड आए।

इनके अलावा 'द न्यू यॉर्कर', 'द वॉशिंगटन पोस्ट', 'असोसिएटेड प्रेस', 'द लॉल एंजिलिस टाइम्स', 'द बाल्टिमोर सन', 'द फीलिस्तीन हेराल्ड प्रेस' को भी अलग-अलग खबरों के लिए पुलित्जर पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। कोरोना वायरस के संक्रमण की वजह से पिछले महीने बोर्ड ने पुरस्कार विजेताओं के नामों की घोषणा स्थगित कर दी थी।

5 अगस्त को हटाया गया था धारा-370

5 अगस्त को मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाया था। इसके बाद सरकार ने प्रदेश को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बांट दिया था। इससे पहले ही कश्मीर के प्रमुख नेताओं को नजरबंद कर दिया गया। यहां महीनों तक कर्फ्यू लगा रहा और टेलीफोन के साथ-साथ इंटरनेट सेवाओं पर रोक लगी रही थी। ऐसे में कश्मीर के पत्रकारों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर बताया था कि इंटरनेट बंद रहने से उनका काम प्रभावित हो रहा है।

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