
नई दिल्ली. अक्टूबर के आस पास का समय हर भारतीय के लिए सबसे रोमांचक रहता है। अक्टूबर- नवंबर त्योहारों के लिए जाना जाता है। नवरात्रि, दुर्गा पूजा, दशहरा और दीवाली। कोरोना महामारी के चलते पिछले कुछ महीनों से लोग अपने घरों में दीवारों तक सीमित हैं, ऐसे में लोग अब सकारात्मक भावनाओं के साथ त्योहारों पर बाहर निकलने का फैसला कर सकते हैं।
LocalCircles ने हाल ही में यह जानने के लिए एक सर्वे किया कि लोग आने वाले त्योहारी सीजन को किस तरह समाजिक बनाना चाहते हैं। इस सर्वे में 226 जिलों के 28 हजार लोगों ने हिस्सा लिया। सर्वे के मुताबिक, 36% भारतीय कोरोना के बीच त्योहारों को सामाजिक रूप से मनाने के लिए तैयार दिख रहे हैं।
सवाल -1 : लोगों से पूछा गया कि वे इस त्योहारी सीजन को किस तरह से समाजिक बनाने की योजना बना रहे हैं?
इस सवाल के जवाब में 3% लोगों ने कहा कि वे पड़ोस में आयोजित कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। वहीं, 3% ने कहा कि वे पार्टियों में शामिल होंगे। जबकि 23% लोगों ने कहा कि वे पारिवारिक और करीबी दोस्तों के यहां जाएंगे। वहीं, 7% लोगों ने कहा कि वे ये सभी चीज करेंगे। 51% लोगों ने कहा कि वे त्योहारों को समाजिक तौर पर नहीं मनाएंगे। इससे साफ होता है कि 36% भारतीय इन त्योहारों को समाजिक बनाने के लिए तैयार हैं।
अभी तक कोरोना वायरस के प्रभाव के चलते भारतीय एक दूसरे से मिलने से बचते रहे हैं, भीड़-भाड़ वाली जगहों पर भी जाने से बचते दिखे हैं। लेकिन ऐसा लगता है कि आगामी त्योहारों के दौरान अब लोग इन सबसे बाहर आने वाले हैं।
सितंबर में केरल में बढ़े केस
सितंबर में केरल में ओनम त्योहार के समय लोग कुछ लापरवाह दिखे। इसका नतीजा यह हुआ कि यहां हर रोज निकलने वाले केस 10 हजार तक पहुंच गए। पहले हर रोज 4 हजार केस सामने आ रहे थे। इसके चलते केरल सरकार ने पूरे अक्टूबर तक धारा 144 लगा दी। इसके चलते 5 से ज्यादा लोगों के इकट्ठा होने पर रोक है।
दूसरा सवाल: लोगों से सवाल पूछा गया कि क्या प्राथमिक कारण है कि लोग इन त्योहारों को सामाजिक तौर पर बनाना चाहते हैं?
इसके जवाब में 17% लोगों ने कहा कि उनके लिए और उनके परिवारों के लिए यह साल काफी कठिनाई भरा रहा। इन त्योहारों को समाजिक करने से उनके परिवारों में नई ऊर्जा आएगी। 10% लोगों ने कहा कि सामाजिक दबाव के चलते वे ऐसा करेंगे। वहीं, 63% लोगों ने कहा कि वे बचाव के साथ त्योहारों को सामाजिक तरीके से मनाएंगे ताकि सब कुछ ठीक हो जाए। वहीं, 5% लोगों ने कहा कि उन्हें पहले कोरोना हो चुका है, इसलिए चिंता की कोई बात नहीं है। वहीं, 5% लोगों ने कहा कि वे कुछ कह नहीं सकते।
इससे पता चलता है कि जो 63% लोग इस त्योहारी सीजन को सामाजिक बनाना चाहते हैं, उनका मानना है कि वे सावधानियों का पालन करके सुरक्षित रहेंगे। लेकिन लोगों को सामाजिक बनाने की योजना के पीछे सामाजिक दबाव की आवश्यकता भी एक कारण है।
भारत में कोरोना के 70 लाख केस सामने आ चुके हैं। मंत्रालय ने भी त्योहारों को देखते हुए एसओपी जारी कर दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 अक्टूबर को कोरोना को लेकर जन आंदोलन की शुरुआत की। उन्होंने कहा, सरकार ज्यादा कोरोना संक्रमित जिलों में नया एक्शन प्लान लाएगी। आखिरी में लोगों को याद रखना होगा कि कोरोना अभी भी हमारे बीच में है, ऐसे में हमें सावधानियां बरतनी होंगी।
कैसे हुआ सर्वे?
इस सर्वे में 226 जिलों के 28 हजार लोगों ने हिस्सा लिया। इनमें 69% पुरुष और 31% महिलाएं शामिल हैं। 58% लोग टियर 1 के, 28% टियर 2 के और 14% टियर 3 और टियर 4 और ग्रामीण इलाके के हैं। यह सर्वे LocalCircles प्लेटफॉर्म पर किया गया। इसमें भाग लेने वाले सभी लोग LocalCircles के साथ रजिस्टर्ड थे।
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