
नई दिल्ली. मोदी सरकार द्वारा लाए गए नागरिकता संशोधन कानून पर देशभर में मचे गदर के बीच सोमवार को पाकिस्तान से कई हिंदुओं ने भारत में कदम रखा है। जिसमें तकरीबन दो सौ पाकिस्तानी हिंदू अटारी-वाघा बॉर्डर से भारत आए, इनमें से अधिकतर का कहना है कि वो पाकिस्तान वापस नहीं जाना चाहते हैं। पाकिस्तान में कई ऐसे मामले सामने आए हैं जहां हिंदुओं पर प्रताड़ना के मामले सामने आए हैं।
समाचार एजेंसी PTI के मुताबिक, सोमवार को करीब 50 परिवार वाघा बॉर्डर से भारत आए। ये सभी लोग करीब 25 दिन का वीज़ा लेकर भारत आए हैं और हरिद्वार घूमना चाहते हैं। हालांकि, कुछ लोगों ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा है कि वह वापस पाकिस्तान नहीं जाना चाहते हैं, क्योंकि वहां पर वह खुद को सुरक्षित नहीं महसूस करते हैं।
कराची और सिंध के रहने वाले हैं पाकिस्तानी
सोमवार को जो परिवार भारत आए वो अधिकतर कराची, सिंध इलाके के रहने वाले हैं। कुछ लोग राजस्थान में अपने रिश्तेदारों से मिलने जाएंगे, तो वहीं कुछ हरिद्वार घूमने जाएंगे। इन्हीं में से एक महिला का कहना है कि पाकिस्तान में अब वह सुरक्षित महसूस नहीं करते हैं, क्योंकि पुलिस के सामने ही किसी को भी किडनैप कर लिया जाता है। नॉर्थ वेस्ट एरिया में आज कोई महिला सुरक्षित नहीं है।
CAA लागू होने के बाद बढ़ा पाकिस्तान से आने वालों की संख्या
अकाली दल के नेता और दिल्ली सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी के अध्यक्ष मनजिंदर सिंह सिरसा ने इन सभी को वाघा बॉर्डर पर रिसीव किया। सिरसा ने दावा किया कि ये लोग वो हैं जिन्हें पाकिस्तान में धार्मिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है। सिरसा का कहना है कि वह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात करेंगे और इन्हें भारतीय नागरिकता देने की अपील करेंगे।
दूसरी ओर बॉर्डर पर मौजूद अधिकारियों का दावा है कि जबसे भारत में नागरिकता संशोधन एक्ट पास हुआ है, तब से पाकिस्तान की ओर से आने वाले हिंदुओं की संख्या बढ़ गई है।
लागू हुआ संशोधित नागरिकता कानून
दिसंबर 2019 में मोदी सरकार द्वारा लाए गए नागरिकता संशोधन एक्ट के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान से आए हिंदू, जैन, सिख, ईसाई, बौद्ध और पारसी शरणार्थियों को भारत की नागरिकता मिलने में आसानी होगी। इन सब के इतर इस कानून के खिलाफ भारत में जोरदार विरोध जारी है और इस कानून को वापस लाने की मांग की जा रही है।
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