Iran-US War Impact: भारत का बड़ा फैसला-अब इन 4 सेक्टरों को गैस सप्लाई में मिलेगी प्रायोरिटी
Energy Alert: ईरान-US तनाव और होर्मुज स्ट्रेट संकट के बीच भारत ने घरेलू नैचुरल गैस की सप्लाई को LPG, CNG और पाइप्ड गैस जैसे ज़रूरी सेक्टरों को प्राथमिकता देने का फैसला किया। क्या इससे घरों की गैस बच पाएगी और कीमतों में उछाल रुकेगा?

India Energy Security Plan: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान-US संघर्ष के कारण दुनिया भर के ऊर्जा बाजार में हलचल बढ़ गई है। खासतौर पर होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही कम होने से तेल और गैस की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ रही है। इसी खतरे को देखते हुए भारत सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने घरेलू तौर पर बनने वाली नैचुरल गैस की सप्लाई को कुछ खास सेक्टरों के लिए प्राथमिकता देने का फैसला किया है ताकि घरों में गैस की कमी न हो। सरकार के नए गजट नोटिफिकेशन के अनुसार अब LPG बनाने वाली यूनिट्स को भी प्राथमिकता वाली सूची में शामिल किया गया है। पहले यह प्राथमिकता सिर्फ CNG (कम्प्रेस्ड नैचुरल गैस) और पाइप्ड कुकिंग गैस के लिए थी। लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए सरकार ने गैस वितरण नीति में बदलाव किया है।
होर्मुज स्ट्रेट संकट: क्यों बढ़ गई भारत की चिंता?
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का सबसे अहम समुद्री ऊर्जा मार्ग माना जाता है। दुनिया में समुद्र के रास्ते भेजे जाने वाले तेल का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। इसके अलावा वैश्विक LNG शिपमेंट का लगभग एक-तिहाई हिस्सा भी यहीं से जाता है। अगर इस रास्ते में रुकावट आती है तो भारत जैसे देशों पर सीधा असर पड़ सकता है, क्योंकि भारत अपनी गैस और तेल की जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। हाल के तनाव के कारण जहाजों की आवाजाही कम हुई है और बीमा प्रीमियम भी बढ़ गए हैं।
सरकार ने गैस सप्लाई के लिए किन सेक्टरों को दी प्राथमिकता?
सरकार ने गैस वितरण के लिए चार अहम सेक्टरों को प्राथमिकता दी है।
- 1. LPG उत्पादन: अब घरेलू गैस से LPG बनाने वाली यूनिट्स को पूरी प्राथमिकता दी जाएगी ताकि घरों में सिलेंडर की सप्लाई बनी रहे।
- 2. CNG और पाइप्ड गैस: वाहनों में इस्तेमाल होने वाली CNG और घरों तक पाइपलाइन से पहुंचने वाली गैस की सप्लाई भी पहले की तरह प्राथमिकता में रहेगी।
- 3. फर्टिलाइज़र सेक्टर: खाद बनाने वाले प्लांट्स को उनकी पिछली छह महीने की औसत गैस खपत का लगभग 70 प्रतिशत गैस उपलब्ध कराई जाएगी।
- 4. इंडस्ट्रियल और कमर्शियल सेक्टर: मैन्युफैक्चरिंग और अन्य उद्योगों को लगभग 80 प्रतिशत गैस सप्लाई मिल सकती है, जो उपलब्धता पर निर्भर करेगी।
क्या LPG की कीमतें और बढ़ सकती हैं?
मौजूदा हालात का असर LPG की कीमतों पर पहले ही दिखने लगा है। हाल ही में 14.2 किलो वाले घरेलू सिलेंडर की कीमत लगभग 60 रुपये बढ़ चुकी है। इसकी वजह सप्लाई चेन में रुकावट और वैश्विक ऊर्जा लागत में बढ़ोतरी मानी जा रही है। अगर मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ता है या होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही और कम होती है, तो आने वाले समय में LPG और LNG की कीमतों पर और दबाव पड़ सकता है।
भारत कैसे कम कर रहा है ऊर्जा आयात का जोखिम?
भारत अब ऊर्जा आयात के स्रोतों को विविध बनाने की कोशिश कर रहा है। पहले जहां मिडिल ईस्ट पर ज्यादा निर्भरता थी, वहीं अब अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देशों से भी तेल और LNG आयात बढ़ाया जा रहा है। इस रणनीति का उद्देश्य यह है कि अगर किसी एक क्षेत्र में संकट हो तो देश की ऊर्जा सप्लाई पर ज्यादा असर न पड़े।
क्या भारत के पास LPG का पर्याप्त स्टॉक है?
विशेषज्ञों के अनुसार भारत में LPG का बड़ा रणनीतिक भंडार नहीं है। आमतौर पर देश के पास इतना स्टॉक होता है जो सिर्फ दो से तीन हफ्ते की मांग को ही पूरा कर सकता है। इसलिए किसी भी बड़े जियोपॉलिटिकल संकट का असर जल्दी दिखाई देने लगता है। यही वजह है कि सरकार ने अभी से गैस सप्लाई का पुनर्वितरण शुरू कर दिया है ताकि घरों की रसोई और जरूरी सेवाएं प्रभावित न हों।
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