
Ajit Doval met Russian President Vladimir Putin: यूक्रेन युद्ध के बीच भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की है। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और प्रेसिडेंट पुतिन की मुलाकात रणनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रक्षा सूत्रों के अनुसार दोनों देश आपस में रणनीतिक साझेदारी को जारी रखते हुए भविष्य में भी एक दूसरे का सहयोग करने पर सहमत हुए हैं। रूस में भारतीय दूतावास ने कहा कि इस हाईलेवल बातचीत में द्विपक्षीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा हुई।
अजीत डोभाल बुधवार को रूस की दो दिवसीय यात्रा पर गए हैं। मास्को में भारतीय दूतावास ने एक ट्वीट कर एनएसए और राष्ट्रपति पुतिन के बीच मुलाकात के बारे में जानकारी साझा की गई है। एक दिन पहले बुधवार को अजीत डोभाल अफगानिस्तान सुरक्षा परिषद के सचिवों के साथ पांचवीं बैठक में शामिल हुए। इस मीटिंग का आयोजन रूस में किया गया था। मीटिंग के दौरान डोभाल ने कहा कि यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि कोई भी देश आतंकवाद का इस्तेमाल करने के लिए अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल न करे। इस मीटिंग में रूस और भारत के अलावा ईरान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, चीन, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उज्बेकिस्तान के प्रतिनिधि मौजूद थे।
रूस चाहता है भारत के साथ रिश्तों में विविधता
नई दिल्ली में रूस के राजदूत डेनिस अलीपोव ने सोमवार को कहा कि रूस भारत के साथ अपने संबंधों में विविधता लाना चाहता है। इसीलिए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की रूस यात्रा भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर की रूस यात्रा के ठीक तीन महीने बाद हो रही है। उस समय विदेश मंत्री ने रूस से पेट्रोलियम उत्पादों के आयात की भी बात कही थी। उन्होंने भारत की आर्थिक वास्तविकता पर भी प्रकाश डाला।
इसलिए भी महत्वपूर्ण है डोभाल की मास्को यात्रा...
डोभाल की मॉस्को यात्रा नई दिल्ली में जी-20 के विदेश मंत्रियों की बैठक से कुछ सप्ताह पहले हो रही है। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के भी 1 और 2 मार्च को भारत आने की उम्मीद है। रूस के यूक्रेन पर आक्रमण के बाद भारत कई बार मास्को के साथ अपने मजबूत संबंधों को साबित करना चाहता है। हालांकि, भारत और रूस के बीच इस अच्छे रिश्ते को अमेरिका अभी भी रास नहीं आ रहा है। भारत ने अब तक रूस-यूक्रेन युद्ध में किसी भी देश का समर्थन नहीं किया है। युद्ध को निपटाने और शांति स्थापित करने पर जोर दिया जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शब्दों में बातचीत से ही शांति संभव है। यही नहीं, प्रतिबंध के बावजूद वह अपनी ईंधन जरूरतों को भी रूस से पूरा कर रहा है।
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