
Ankita Murder Case: उत्तराखंड में पूर्व मंत्री के बेटे के रिसॉर्ट में हुई रिसेप्शनिस्ट अंकिता भंडारी की हत्या के बाद से ही मृतका के परिजन गहरे सदमे में हैं। इतना ही नहीं, अंकिता के साथ पढ़ चुके उसके दोस्तों को भी यकीन नहीं हो पा रहा है कि उनकी सबसे अच्छी दोस्त अब उनके बीच नहीं है। अंकिता के एक स्कूल फ्रेंड विवेक नेगी के मुताबिक, वह अपने करियर को लेकर काफी उत्साहित थी और अपनी फैमिली को सपोर्ट करना चाहती थी।
बेहद गरीब परिवार से थी अंकिता :
अंकिता भंडारी के दोस्त विवेक नेगी के मुताबिक, अंकिता बेहद गरीब फैमिली से आती है। वो स्कूल में हमेशा कहती थी कि 12वीं कम्प्लीट करने के बाद वो अपनी फैमिली का भरण-पोषण करने के लिए कोई नौकरी करेगी।
अपने काम से काम रखती थी अंकिता :
विवेक नेगी ने बताया कि हम लोग पौड़ी के पहाड़ी इलाके के रहने वाले हैं। यहां के लोग बेहद सीधे-सादे होते हैं, जो अक्सर नौकरी की तलाश में गांव से बाहर जाते हैं। अंकिता भी एक साधारण लड़की थी और वो ज्यादा बात नहीं करती थी। वो अपने काम से काम रखती थी और उसकी एक ही ख्वाहिश थी कि वो अपने परिवार के लिए कुछ करे।
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गांव की महिलाओं में बेहद गुस्सा :
अंकिता के गांव की महिलाओं में इस हत्या को लेकर बेहद गुस्सा है। कई महिलाओं ने रोते हुए कहा- हत्यारों ने एक ऐसी लड़की को मार दिया, जो अपने घर-परिवार का पेट भरना चाहती थी। इस वाकये ने हमें सोचने पर मजबूर कर दिया है कि हम लोग चार पैसे कमाने अब बच्चों को कैसे बाहर भेजेंगे?
जब तक हत्यारों को फांसी नहीं, हम घर नहीं जाएंगे :
बता दें कि अंकिता का अंतिम संस्कार रविवार शाम को अलकनंदा नदी के किनारे किया गया। इस दौरान अंतिम संस्कार में पहुंचे सैकड़ों लोगों ने पुलिस और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। कुछ महिलाओं ने कहा कि जब तक हत्यारों को फांसी नहीं दी जाएगी, हम अपने घर नहीं जाएंगे।
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20 दिन भी नौकरी नहीं कर सकी अंकिता :
वहीं, अंकिता के चाचा सुरेंद्र सिंह भंडारी के मुताबिक, घर की हालात अच्छी नहीं थी, ऐसे में उसे लगा कि परिवार के कुछ करना चाहिए। 12वीं के बाद होटल मैनेजमेंट का कोर्स करने पर उसे एक रिसॉर्ट में जॉब मिल गई। वह रोज अपनी मम्मी से बात करती थी। लेकिन 18 सितंबर को अचानक उसका मोबाइल बंद हो गया। 1 सितंबर को ही उसने नौकरी ज्वॉइन की थी। हमें क्या पता था कि बेटी 20 दिन भी काम नहीं कर पाएगी।
कौन थी अंकिता भंडारी?
19 साल की अंकिता भंडारी उत्तराखंड में श्रीनगर से पौड़ी के रास्ते पर 22 किमी आगे चलने पर डोभ श्रीकोट गांव की रहने वाली थी। ये गांव बहुत छोटा है और ज्यादातर लोग काम की तलाश में शहरों की ओर पलायन कर गए हैं। अंकिता ने 5वीं तक की पढ़ाई सरस्वती विद्या मंदिर से की। इसके बाद भगतराम इंग्लिश मीडियम स्कूल से 12वीं पास की। इसके बाद उसने देहरादून से होटल मैनेजमेंट का कोर्स किया। इसी बीच ऋषिकेश के वनंतरा रिसॉर्ट में उसे रिसेप्शनिस्ट की नौकरी मिल गई। अंकिता को यहां ज्वॉइन किए महज 18 दिन ही हुए थे और उसकी हत्या कर दी गई।
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