
West Bengal SSC Scam: बंगाल के शिक्षक भर्ती घोटाले के मुख्य आरोपी पार्थ चटर्जी और उनकी करीबी अर्पिता मुखर्जी से ईडी लगातार पूछताछ कर रही है। फिलहाल दोनों 3 अगस्त तक हिरासत में हैं। ईडी को हाल ही में अर्पिता मुखर्जी के बैंक खातों से 8 करोड़ के लेनदेन का पता चला है। इसी बीच, अब इस घोटाले में पार्थ चटर्जी की एक और करीबी मोनालिसा दास का भी नाम सामने आ रहा है। TMC की पूर्व नेता और पश्चिम बंगाल कॉलेज यूनिवर्सिटी प्रोफेसर एसोसिएशन (WBCUPA) की महासचिव रह चुकी बैसाखी बनर्जी ने हाल ही में एक इंटरव्यू में पार्थ चटर्जी और मोनालिसा से जुड़े कुछ बड़े खुलासे किए हैं।
पार्थ चटर्जी की गर्लफ्रेंड रह चुकी है मोनालिसा :
बैसाखी बनर्जी के मुताबिक, पार्थ की करीबी सिर्फ अर्पिता मुखर्जी ही नहीं है, बल्कि आसनसोल की प्रोफेसर मोनालिसा दास भी उनकी गर्लफ्रेंड रह चुकी है। मोनालिसा जिस कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर थीं, वहां के वाइस चांसलर की पत्नी ने मुझे मोनालिसा के बारे में बताया था। उन्होंने बताया था कि पार्थ चटर्जी की गर्लफ्रेंड मोनालिसा दास का मेरे हसबैंड के साथ अफेयर चल रहा है। मेरा घर बर्बाद हो रहा है। अगर आप उन्हें जानती हैं तो कुछ कीजिए। इस पर मैंने उनसे कहा- आपके पास क्या सबूत है कि मोनालिसा और पार्थ एक-दूसरे के साथ रिलेशन में हैं।
मोनालिसा और पार्थ चटर्जी की चैट अब भी मेरे पास :
बैसाखी बनर्जी के मुताबिक, जब मैंने उनसे दोनों के रिलेशन के सबूत मांगे तो उन्होंने मुझे पार्थ और मोनालिसा के बीच हुई चैट के स्क्रीनशॉट भेजे। उन्हें देखकर साफ हो गया था कि दोनों में बेहद नजदीकियां हैं। उन दोनों की वो चैट अब भी मेरे पास है। पार्थ चटर्जी की करीबी होने की वजह से मोनालिसा ने बहुत कम समय में काफी नाम बना लिया। बंगाल में TMC के एक MLA ने भी मुझसे कहा था कि मोनालिसा बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है।
विरोध करने पर मेरा ट्रांसफर करवा दिया :
बैसाखी बनर्जी के मुताबिक, मैंने पार्थ चटर्जी का कई बार विरोध किया। इसकी वजह से मेरा ट्रांसफर दूसरी जगह कर दिया गया था। ट्रांसफर होते ही मैंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। जबकि मेरी नौकरी अभी 22 साल बची हुई थी। मैं जब पार्थ चटर्जी की पत्नी को श्रद्धांजलि देने गई थी तो वहां मैंने अर्पिता मुखर्जी को देखा था। तब मैं नहीं जानती थी कि वो पार्थ की इतनी करीबी हो चुकी है।
पार्थ चटर्जी के साथ रहती थीं कई लड़कियां :
बैसाखी बनर्जी के मुताबिक, मैंने पार्थ के आसपास कई लड़कियों को देखा है। कई बार तो लड़कियां उनका पसीना तक पोंछती थीं। मैं पार्थ चटर्जी को पिछले 6 साल से जानती हूं। उनके जिद करने पर ही मैं WBCUPA की महासचिव बनी थी। पार्थ चटर्जी जब एजुकेशन मिनिस्टर थे तब भी बहुत सारी ऐसी लड़कियों को नौकरी दी गई, जो ज्यादा पढ़ी-लिखी नहीं थीं।
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