
नई दिल्ली(गिरीश लिंगन्ना)। लड़ाकू विमान जैसे बड़े हथियारों के सौदे में जियोपोलिटिक्स की बड़ी भूमिका होती है। भारत का तेजस फाइटर जेट भी इससे अछूता नहीं है। इस विमान HAL (Hindustan Aeronautics Limited) ने तैयार किया है। दक्षिण अमेरिकी देश अर्जेंटीना भारत से तेजस विमान खरीदना चाहता है। इसके लिए बातचीत हो रही है, लेकिन फॉकलैंड द्वीप को लेकर यूके के साथ विवाद के चलते यह सौदा नहीं हो पा रहा है।
यूके ने अर्जेंटीना को हथियारों के निर्यात पर बैन लगा रखा है। इसके अनुसार दूसरे देश भी उन हथियारों को अर्जेंटीना को नहीं बेच सकते, जिसमें ब्रिटेन द्वारा बनाए गए पार्ट्स लगाए गए हों। तेजस विमान में बेकर की पायलट इजेक्टर सीट लगे हैं, जिसके चलते इन्हें वर्तमान में अर्जेंटीना को नहीं बेचा जा सकता।
1833 से फॉकलैंड द्वीप पर है ब्रिटेन का कंट्रोल
अर्जेंटीना और यूके के बीच फॉकलैंड द्वीप समूह को लेकर लंबे समय से विवाद है। यह द्वीप समूह अर्जेंटीना के करीब है। अर्जेंटीना इसे अपना हिस्सा बताता है। दूसरी ओर यूके इसपर से कब्जा हटाना नहीं चाहता। 1833 से ही इस द्वीप समूह पर ब्रिटेन का कंट्रोल है। 1982 में अर्जेंटीना ने द्वीप समहू पर कब्जा करने के लिए हमला किया था। इस दौरान ब्रिटेन और अर्जेंटीना के सैनिकों के बीच लड़ाई हुई थी, जिससे बहुत से सैनिकों की जा गई थी। इसके बाद से दोनों देशों के रिश्ते तनावपूर्ण हैं। अर्जेंटीना ने द्वीपों पर संप्रभुता का दावा करना जारी रखा है, जबकि यूनाइटेड किंगडम का कहना है कि फॉकलैंड द्वीपवासियों को अपने बारे में फैसला लेने का अधिकार है।
तेजस के मार्क 1ए वैरिएंट को किया जाएगा निर्यात
तेजस एक इंजन वाला विमान है। डेल्टा विंग डिजाइन वाला यह विमान मल्टीरोल फाइटर है। इसके मार्क 1ए वैरिएंट को निर्यात किया जाएगा। तेजस में ब्रिटेन द्वारा बनाए गए कई पार्ट्स लगे हैं। इसमें कोभम लिमिटेड का एक रेडोम और स्कॉटिश ब्रांड डनलप के टायर शामिल हैं। विमान को अर्जेंटीना को बेचने से पहले पार्ट्स को भारत में बने पार्ट्स से बदलना होगा। तेजस में ब्रिटेन की कंपनी मार्टिन-बेकर की इजेक्शन सीट लगी है।
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मार्टिन-बेकर द्वारा दुनिया भर में 90 से अधिक वायु सेना को इजेक्शन सीटें दिया जाता है। मार्टिन-बेकर की इजेक्शन सीटों का विकल्प खोजने के लिए एचएएल वर्तमान में इजेक्शन सीटों के रूसी निर्माता एनपीपी ज्वेज्डा के साथ बातचीत कर रहा है। अर्जेंटीना को तेजस बेचने के लिए एचएएल को पहले यह तय करना होगा कि विमान के लगे सभी ब्रिटिश पूर्जों को भारत में बने पूर्जों से बदला जाए।
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