
चंडीगढ़। खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह (Amritpal Singh) को पंजाब पुलिस (Punjab Police) ने रविवार सुबह मोगा जिले के रोड़ेवाल गुरुद्वारा से गिरफ्तार किया। पुलिस अमृतपाल को बठिंडा ले गई। यहां उसका मेडिकल कराया गया। इसके बाद पुलिस उसे विशेष विमान से असम के डिब्रूगढ़ ले जाया गया। अमृतपाल को डिब्रूगढ़ जेल में रखा गया है। यहां पापलप्रीत समेत अमृतपाल के कई करीबी पहले से बंद हैं। अमृतपाल को पंजाब के जेल में रखना सुरक्षित नहीं था, जिसके चलते पुलिस ने उसे असम ले जाने का फैसला किया है। अब असम का डिब्रूगढ़ जेल अमृतपाल का नया ठिकाना बन गया है।
बेहद सुरक्षित है डिब्रूगढ़ सेंट्रल जेल
डिब्रूगढ़ सेंट्रल जेल बेहद सुरक्षित जेल है। यह पूर्वोत्तर के सबसे पुराने जेलों में से एक है। इस जेल में मल्टीलेयर सिक्योरिटी सिस्टम है। असम पुलिस के ब्लैक कैट कमांडो जेल की सुरक्षा करते हैं। जेल परिसर में हो रही हर हरकत की निगरानी सीसीटीवी कैमरे की मदद की जाती है।
1859-60 में हुई थी जेल की स्थापना
डिब्रूगढ़ जेल की स्थापना ब्रिटिश राज के दौरान 1859-60 में हुई थी। अंग्रेज हुकूमत ने जेल के निर्माण के लिए 2700 रुपए की मंजूरी दी थी। पैसे कम खर्च हो इसके लिए कैदियों से काम लिया गया था। उस वक्त जेल की स्थिति बाड़े जैसी थी। बाद में जेल के पक्के मकान का निर्माण कराया गया था। यह असम ट्रंक रोड के पास फूल बागान इलाके में मौजूद है। जेल परिसर का क्षेत्रफल 76206 वर्ग मीटर है। इसके चारों ओर 30 फीट ऊंची दीवारें बनाई गईं हैं।
डिब्रूगढ़ जेल में 680 कैदियों को रखने की क्षमता है। इसमें 94 शौचालय, एक अस्पताल और एक स्कूल है। सजायाफ्ता कैदियों से जेल के गार्डन में काम कराया जाता है। कैदियों को हस्तशिल्प की ट्रेनिंग दी जाती है। उसने घरों में इस्तेमाल होने वाले सामान बनवाये जाते हैं। जेल में कई कुख्यात कैदी बंद हैं। अमृतपाल सिंह और उसके सहयोगियों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगाया गया है। ऐसे हाई प्रोफाइल कैदियों के रखे जाने से डिब्रूगढ़ जेल चर्चा में है।
36 दिन से फरार चल रहा था अमृतपाल
गौरतलब है कि अमृतपाल 36 दिन से फरार चल रहा था। अमृतसर जिले के अजनाला थाना पर हमला करने के आरोप में अमृतपाल को गिरफ्तार करने के लिए पंजाब पुलिस ने 18 मार्च को उसके ठिकाने पर छापा मारा था। वह चकमा देकर भाग निकला था। इसके बाद से पुलिस अमृतपाल को गिरफ्तार करने की कोशिश कर रही थी।
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