
Bengaluru Tech Summit 2022: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बेंगलुरू में शुरू हुए एशिया के सबसे बड़े टेक्नोलॉजी इवेंट बेंगलुरू टेक समिट (BTS) के लिए एक वीडियो संदेश जारी किया है। इसमें उन्होंने कहा कि भारत गरीबी के खिलाफ लड़ाई में टेक्नोलॉजी को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। साथ ही देश के युवाओं ने तकनीक और टैलेंट को ग्लोबलाइज करना सुनिश्चित किया है।
भारत में लाल फीताशाही नहीं बल्कि रेड कार्पेट :
इस वीडियो संदेश में पीएम ने यह भी कहा कि भारत लालफीताशाही (Red Tapism) के लिए जानी जाने वाली जगह नहीं है। यह इन्वेस्टर्स (निवेशकों) के लिए रेड कार्पेट के लिए जाना जाता है। चाहे वह एफडीआई रिफॉर्म्स हो, ड्रोन नियमों का उदारीकरण हो, सेमीकंडक्टर सेक्टर में कदम हो या अलग-अलग सेक्टर्स में प्रोडक्शन इंसेंटिव स्कीम्स। भारत ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के लिए जाना जाता है।
भारत की टेक्नोलॉजी और इनोवेंशस से पूरी दुनिया प्रभावित :
मोदी ने आगे कहा- भारत में कई बेहतरीन फैक्टर्स एक साथ आ रहे हैं। ऐसे में आपका इन्वेस्टमेंट और हमारा इनोवेशन चमत्कार ला सकता है। आपका भरोसा और टेक टैलेंट चीजों को आसान और संभव बना सकता है। मैं आप सभी को हमारे साथ काम करने के लिए आमंत्रित करता हूं क्योंकि हम दुनिया की समस्याओं को हल करने में सबसे आगे हैं। उन्होंने कहा कि भारत की टेक्नोलॉजी और इनोवेशंस ने पहले ही दुनिया को प्रभावित किया है। हालांकि, भविष्य हमारे वर्तमान से भी बहुत बड़ा होगा। क्योंकि भारत के पास इनोवेटिव यूथ और तेजी से बढ़ती हुई तकनीक है।
हर फील्ड में नेतृत्व कर रहे भारतीय युवा :
मोदी ने कहा- भारत के युवाओं की ताकत दुनिया भर में जानी जाती है। उन्होंने टेक ग्लोबलाइजेशन और टैलेंट ग्लोबलाइजेशन को सुनिश्चित किया है। हेल्थकेयर हो, मैनेजमेंट हो या फिर फाइनेंस, आप भारतीय युवाओं को कई क्षेत्रों का नेतृत्व करते हुए पाएंगे। हम अपने टैलेंट का इस्तेमाल वैश्विक भलाई के लिए कर रहे हैं। भारत में भी इनका असर देखा जा रहा है।
भारत दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप हब :
पीएम मोदी ने आगे कहा- भारत इस साल ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स में 40वें नंबर पर पहुंच गया है। 2015 में हम 81 वें स्थान पर थे। भारत में यूनिकॉर्न स्टार्टअप की संख्या 2021 से दोगुनी हो गई है। अब हम दुनिया में तीसरे सबसे बड़े स्टार्टअप हब हैं। हमारे पास 81 हजार से ज्यादा मान्यता प्राप्त स्टार्टअप हैं। सैकड़ों अंतर्राष्ट्रीय कंपनियां हैं, जिनके भारत में रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर हैं। ऐसा भारत के टैलेंट पूल की वजह से है।
देश में आ रही मोबाइल और डेटा क्रांति :
पीएम मोदी ने अपने संदेश में कहा- तकनीकी पहुंच बढ़ाकर भारतीय युवाओं को सशक्त बनाया जा रहा है। देश में मोबाइल और डेटा क्रांति हो रही है। पिछले 8 सालों में ब्रॉडबैंड कनेक्शन 60 मिलियन (6 करोड़) से बढ़कर 810 मिलियन (81 करोड़) हो गए हैं। स्मार्टफोन यूजर्स 150 मिलियन (15 करोड़) से बढ़कर 750 मिलियन (75 करोड़) हो गए हैं। शहरी क्षेत्रों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट का विकास तेजी से हुआ है।
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भारत ने बताया कैसे होता है टेक्नोलॉजी का लोकतंत्रीकरण :
लंबे समय तक, टेक्नोलॉजी को एक विशेष डोमेन के रूप में देखा गया और इसे केवल हाई प्रोफाइल और ताकतवर लोगों के लिए ही समझा गया। लेकिन भारत ने दिखाया है कि टेक्नोलॉजी का लोकतंत्रीकरण कैसे किया जाता है। भारत ने यह भी दिखाया है कि तकनीक को मानवीय स्पर्श कैसे दिया जाता है। भारत में टेक्नोलॉजी, समानता और सशक्तिकरण की एक ताकत है।
भारत ने दिए आयुष्मान और कोविन जैसे टेक बेस्ड प्लेटफॉर्म :
दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना 'आयुष्मान भारत' का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा-यह योजना करीब 20 करोड़ परिवारों यानी कि 60 करोड़ लोगों को सुरक्षा मुहैया कराती है। यह कार्यक्रम एक टेक प्लेटफॉर्म के आधार पर चलाया जाता है। भारत ने दुनिया का सबसे बड़ा COVID-19 वैक्सीन अभियान चलाया। इसे भी COWIN नामक टेक्नोलॉजी बेस्ड प्लेटफॉर्म के माध्यम से चलाया गया।
कम डेटा लागत से गरीब छात्रों को मिली ऑनलाइन क्लासेज :
एजुकेशन सेक्टर पर बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा- भारत में ओपन कोर्सेस का सबसे बड़ा ऑनलाइन भंडार है। अलग-अलग विषयों में हजारों कोर्स मौजूद हैं। 10 मिलियन (1 करोड़) से ज्यादा सफल प्रमाणन हुए हैं। यह सब ऑनलाइन और मुफ्त किया जाता है। हमारे डेटा टैरिफ दुनिया में सबसे कम हैं। कोरोना महामारी के दौरान, कम डेटा लागत ने गरीब छात्रों को ऑनलाइन क्लास में हिस्सा लेने में मदद की। अगर ऐसा न होता तो उनके कीमती दो साल बर्बाद हो जाते।
जमीन का नक्शा बनाने के लिए ड्रोन का इस्मेमाल :
पीएम ने कहा- भारत गरीबी के खिलाफ जंग में टेक्नोलॉजी को एक हथियार के तौर पर उपयोग कर रहा है। 'स्वामित्व' योजना के तहत, ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन का नक्शा बनाने के लिए हम ड्रोन का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके बाद लोगों को संपत्ति कार्ड दिए जा रहे हैं। इससे जमीन विवादों में कमी आएगी। यह गरीबों को वित्तीय सेवाओं तक पहुंचने में भी मदद करता है।
भारत ने बताया, कैसे तकनीक बन सकती है ताकत :
कोरोना महामारी के दौरान कई देश इस समस्या से जूझ रहे थे। उन्हें पता था कि लोगों को मदद की जरूरत है। वे जानते थे कि बेनिफिट ट्रांसफर से मदद मिलेगी। लेकिन उनके पास लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए बुनियादी ढांचा ही नहीं था। हालांकि, भारत ने दिखाया कि कैसे अच्छे कामों के लिए तकनीक एक ताकत बन सकती है।
लाभार्थियों के खाते में सीधे पहुंचाया पैसा :
हमारे 'जन धन आधार मोबाइल ट्रिनिटी' ने हमें सीधे बेनिफिट ट्रांसफर करने की ताकत दी है। योजनाओं का लाभ सीधे प्रमाणित और सत्यापित लाभार्थियों को मिले, इस दिशा में हमने काम किया। कई गरीब लोगों के खातों में अरबों रुपए ट्रांसफर हुए। कोरोना महामारी के दौरान, हर कोई छोटे व्यवसायों को लेकर चिंतित था। हमने उनकी तो मदद की, साथ ही एक कदम और आगे बढ़ गए। हमने स्ट्रीट वेंडर्स को फिर से कारोबार शुरू करने के लिए वर्किंग कैपिटल (कार्यशील पूंजी) में मदद की। डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल शुरू करने वालों को इंसेंटिव दिया जा रहा है।
भारत में सरकारी ई-मार्केटप्लेस :
पीएम मोदी ने आगे कहा- क्या आपने किसी सरकार के सफल ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के बारे में सुना है? लेकिन यह भारत में हुआ है। हमारे पास सरकारी ई-मार्केटप्लेस है, जिसे GeM भी कहते हैं। यह एक ऐसा प्लेटफॉर्म है, जहां छोटे व्यापारी और व्यवसाय सरकार की जरूरतों को पूरा करते हैं। टेक्नोलॉजी ने छोटे व्यवसायों को बड़ा ग्राहक खोजने में मदद की है। साथ ही इससे भ्रष्टाचार में भी कमी आई है। इसी तरह, तकनीक ने ऑनलाइन टेंडरिंग में मदद की है। इससे प्रोजेक्ट्स में तेजी आने के साथ ही पारदर्शिता भी बढ़ी है।
हमारे पास गति शक्ति नेशनल मास्टरप्लान :
पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टरप्लान के बारे में बात करते हुए मोदी ने कहा- भारत अगले कुछ सालों में बुनियादी ढांचे में 100 ट्रिलियन रुपए से ज्यादा का इन्वेस्टमेंट कर रहा है। किसी भी इंफ्रा प्रोजेक्ट में स्टेकहोल्डर्स की संख्या बहुत बड़ी होती है। भारत में बड़ी परियोजनाओं में अक्सर देरी होती थी, जिसकी वजह से ज्यादा खर्च और समय सीमा का का बढ़ना आम बात थी। लेकिन अब, हमारे पास गति शक्ति साझा मंच है। केंद्र सरकार, राज्य सरकारें, जिला प्रशासन, विभिन्न विभाग आपस में को-ऑर्डिनेट कर सकते हैं। इनमें से हर कोई जानता है कि दूसरा क्या कर रहा है। गति शक्ति नेशनल मास्टरप्लान की वजह से प्रोजेक्ट्स, जमीन उपयोग और संस्थाओं से संबंधित जानकारी एक ही जगह पर उपलब्ध रहती है। ऐसे में हर एक स्टेकहोल्डर ये डेटा देख सकता है। इससे को-ऑर्डिनेशन में सुधार के साथ ही समस्याएं पैदा होने से पहले ही खत्म हो जाती हैं। इससे अप्रूवल और क्लियरेंस में भी तेजी आ रही है।
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