
अहमदाबाद. गुजराज में 15 महीने बाद होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राजनीति का; खासकर भाजपा की सरकार की एक नया अध्याय शुरू हुआ। भूपेंद्र पटेल ने राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली। इस मौक पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह विशेषतौर पर मौजूद रहे। रविवार को भूपेंद्र पटेल को विधायक दल का नेता चुना गया था। पटेल को पूर्व मुख्यमंत्री और इस समय यूपी की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल का करीबी माना जाता है। बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व ने गुजरात चुनाव जैसे मुद्दों पर गहन मंथन करने के बाद गुजरात की कमान भूपेंद्र पटेल को सौंपी है।
राज्य के 17वें मुख्यमंत्री हैं भूपेंद्र पटेल
शपथ ग्रहण समारोह में अमित शाह के अलावा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित पांच राज्यों के मुख्यमंत्री भी मौजूद थे। पटेल ने गुजरात में शपथ ली। वे राज्य के 17वें मुख्यमंत्री हैं। इससे पहले जब अमित शाह अहमदाबाद पहुंचे, तो पटेल खुद उन्हें लेने गए थे। इस दौरान शाह ने पटेल की पीठ थपथपाई थी।
नितिन पटेल से मुलाकात
शपथ ग्रहण से पहले भूपेंद्र पटेल ने अहमदाबाद में उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल से मुलाकात की। नितिन पटेल पहले ही मीडिया से कह चुके हैं कि वे खुद मुख्यमंत्री नहीं चुने जाने से नाराज नहीं हैं। 18 साल से वे जनसंघ से लेकर भाजपा तक जुड़े हैं। लोगों का प्रेम और सम्मान मिलना बड़ी बात है।
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भूपेंद्र पटेल के बारे में..
भूपेंद्र पटेल ने 2017 के विधानसभा चुनाव में पाटीदार आंदोलन के बीच कांग्रेस के शशिकांत पटेल भारी अंतर से हराया था। पटेल ने ये चुनाव 1 लाख 17000 मतों से जीता था। भूपेंद्र पटेल सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुके हैं। बताया जाता है कि गुजरात की मुख्यमंत्री रहते हुए आनंदीबेन पटेल ने खुद उनका समर्थन किया था। आनंदीबेन पटेल को मुख्यमंत्री पद से हटाया गया, तो उन्होंने अपनी सीट से भूपेंद्र पटेल को चुनाव लड़ाने का समर्थन किया था। इतना ही नहीं जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री रहे थे, तब 1999-2001 के बीच पटेल अहमदाबाद नगरपालिका की स्टैंडिंग कमेटी के अध्यक्ष रहे, जबकि 2008-10 के बीच वे अहमदाबाद नगरपालिका स्कूल बोर्ड के उपाध्यक्ष रहे। भूपेंद्र पटेल ने 2017 के विधानसभा चुनाव में पाटीदार आंदोलन के बीच कांग्रेस के शशिकांत पटेल भारी अंतर से हराया था। पटेल ने यह चुनाव एक लाख 17 हजार से ज्यादा मतों से जीता था। क्लिक करके विस्तार से पढ़ें
11 सितंबर को विजय रूपाणी ने इस्तीफा दे दिया था
विजय रूपाणी ने 11 सितंबर को अपना इस्तीफा दे दिया था। इस्तीफे के बाद विजय रूपाणी ने कहा था-भाजपा में कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारियां बदलती रहती हैं। हम सब मोदी के नेतृत्व में चुनाव लड़ते हैं, इसलिए हमारे उनके(रूपाणी) नेतृत्व का कोई सवाल नहीं उठता। गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत को इस्तीफा सौंपने के बाद मीडिया से विजय रूपाणी बोले कि वे भाजपा के प्रति आभार व्यक्त करते हैं, जिसने उन जैसे कार्यकर्ता को गुजराज के मुख्यमंत्री पद की महत्वूर्ण जिम्मेदारी सौंपी थी। उन्हें अपने कार्यकाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मार्गदर्शन मिलता रहा। मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में ही गुजरात ने नए आयाम छुए हैं। विजय रूपाणी ने उन सभी अफवाहों को खारिज कर दिया, जिसमें माना गया कि उनका संगठन से तालमेल नहीं बैठ रहा था। रूपाणी ने कहा कि संगठन सर्वोपरी है। उनकी संगठन से कोई तकरार नहीं है। गुजरात के विकास का काम पहले की तरह चलता रहेगा।
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