
नई दिल्ली। भारत समेत दुनियाभर में चांद 15 फीसदी ज्यादा चमकीला दिखा। धरती के सबसे करीब आने के चलते चांद का आकार भी सात फीसदी बढ़ा हुआ दिखा। भारत में 12 बजकर आठ मिनट पर चांद सबसे बड़ा दिखा। बुधवार-गुरुवार की दरम्यानी रात दिखा सुपरमून 2022 का सबसे बड़ा सुपरमून है। इस साल चार सुपरमून दिखने वाले हैं। बुधवार की रात दिखा सुपरमून तीसरा है। नासा के अनुसार इस साल का चौथा और आखिरी सुपरमून 12 अगस्त को दिखेगा।
सुपरमून खगोलीय घटना है। इस दौरान चंद्रमा सामान्य से बड़ा और चमकीला दिखाई देता है। जुलाई सुपरमून को बक सुपरमून भी कहा जाता है, क्योंकि यह वह समय होता है जब हिरन या नर हिरण के नए सींग उनके माथे से निकलते हैं। ये हिरण हर साल अपने सींगों को गिरा देते हैं जो फिर से उग आते हैं। जुलाई के सुपरमून को थंडर मून भी कहा जाता है, क्योंकि इस दौरान अक्सर गरज के साथ बारिश होती है।
क्या है सुपरमून?
चांद पृथ्वी का एक मात्र उपग्रह है। यह पृथ्वी का चक्कर काटता रहता है। चांद जिस कक्षा पर घूमते हुए पृथ्वी का चक्कर काटता है वह गोल नहीं अंडाकार है। इसके चलते धरती से चांद की दूरी हर दिन बदलती रहती है। चांद 27 दिन में धरती का एक चक्कर लगाता है। इस दौरान वह एक बार पृथ्वी के सबसे करीब और एक बार सबसे दूर पहुंचता है।
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धरती से चांद की औसत दूरी 3,84,400 किलोमीटर है। सबसे करीब आने पर यह धरती से 3,57,264 किलोमीटर दूर होता है। वहीं, सबसे दूर रहने पर 4,05,500 किलोमीटर दूर पहुंच जाता है। हर 29.5 दिन में एक दिन पूर्णिमा आती है। इसी तरह हर 27 दिन में एक दिन चांद धरती के सबसे करीब होता है, लेकिन हर पूर्णिमा को सुपरमून नहीं होता। सुपरमून तभी होता है जब चांद धरती के सबसे करीब हो और उसी रात पूर्णिमा भी हो।
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