
Telangana Assembly Election 2023: तेलंगाना में के.चंद्रशेखर राव की भारत राष्ट्र समिति को बड़ा झटका लगने वाला है। बीआरएस के तीन दर्जन के करीब नेता, कांग्रेस का दामन थामने जा रहे हैं। बीआरएस लीडर पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी और पूर्व मंत्री जुपल्ली कृष्णा राव के साथ सोमवार को कई नेताओं ने दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय पहुंच पार्टी ज्वाइन कर लिया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी इनकी ज्वाइनिंग में मौजूद रहे। कांग्रेस सूत्रों की मानें तो बीआरएस और बीजेपी के कई अन्य नेता एक कार्यक्रम में कांग्रेस ज्वाइन करेंगे।
रेड्डी और कृष्णाराव को बीआरएस ने अप्रैल में किया था सस्पेंड
पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी और जुपल्ली कृष्णा राव दोनों को अप्रैल में पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए बीआरएस से निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद से दोनों नेताओं को बीजेपी और कांग्रेस से बातचीत चल रही थी। हालांकि, बीजेपी में जाने की बजाय ये दोनों नेता कांग्रेस की ओर अपना झुकाव प्रदर्शित किए हैं। इसके बाद सोमवार को कांग्रेस ज्वाइन कर लिया। दरअसल, पड़ोसी राज्य कर्नाटक में पार्टी की जीत के बाद तेलंगाना में कांग्रेस का मनोबल काफी बढ़ गया और वह राज्य में तेज हुई है। साथ ही भाजपा खम्मम में मजबूत नहीं है। खम्मम में कांग्रेस, वामपंथी दल और चंद्रबाबू नायडू की तेलुगु देशम पार्टी पारंपरिक रूप से मजबूत रही है। पिछले साल नवंबर में मुनुगोडे उपचुनाव में बीआरएस और वाम दलों के एक साथ आने के कारण भाजपा उम्मीदवार हार गया था।
जुपल्ली कृष्णा राव की प्रतिद्वंद्विता बीजेपी नेता से
जुपल्ली कृष्णा राव कोल्लूर से पांच बार विधायक और महबूबनगर से पूर्व मंत्री हैं। उनके लंबे समय से राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी डीके अरुणा राज्य भाजपा में मजबूत स्थिति में हैं। ऐसे में कृष्णा राव का बीजेपी में जाने का कोई सवाल ही नहीं था। उधर, रेड्डी को खम्मम में काफी मजबूत स्थिति में हैं। हालांकि, यहां बीआरएस कमजोर है। वह 2014 में वाईएसआरसीपी सांसद के रूप में जीतने में कामयाब रहे थे और यहां तक कि पार्टी को तीन विधायक सीटें जीतने में भी मदद की थी। लेकिन उन पर संदेह है कि उन्होंने 2018 के चुनावों में मंत्री पुववाड़ा अजय कुमार को हराने के लिए काम किया था और बाद में उन्हें सांसद के टिकट से वंचित कर दिया गया था।
चंद्रशेखर राव अपने तीसरे कार्यकाल के लिए रणनीति बना रहे
मुख्यमंत्री के.चंद्रशेखर राव साल के अंत में होने वाले चुनाव में तीसरा कार्यकाल पाने के लिए चुनाव मैदान में होंगे। 2014 में आंध्र प्रदेश से अलग होकर तेलंगाना के गठन के बाद वह लगातार मुख्यमंत्री बने हैं। बीते चुनाव में बीआरएस को 46.87 प्रतिशत वोट मिले थे जबकि कांग्रेस को 28.43 प्रतिशत वोट मिले थे। असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम को सात सीटों पर जीत मिली थी तो बीजेपी को केवल एक सीट पर जीत हासिल हुई।
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