
नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार, 1 फरवरी को आम बजट पेश किया। इसमें उन्होंने शिक्षा क्षेत्र को और अधिक उन्नत बनाने के लिए कई ऐलान किए। इन्हीं में एक है डिजिटल यूनिवर्सिटी की स्थापना। जी हां, मोदी सरकार अब देश में डिजिटल यूनिवर्सिटी खोलने जा रही है। यह हब एंड स्पोक मॉडल पर आधारित होगी।
दरअसल, मोदी सरकार ने डिजिटल यूनिवर्सिटी को खोलने की पहल बीते दो साल में कोरोना महामारी और इससे प्रभावित हुई शिक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए की है। इसका मकसद देशभर में छात्रों को अब घर बैठे वर्ल्ड क्लास एजुकेशन देना है। डिजिटल यूनिवर्सिटी खोलने का उद्देश्य क्या है। यह कैसे काम करेगी। छात्रों को इससे क्या और कैसे लाभ होगा, जैसे सभी सवालों के जवाब हम आपको यहां देने जा रहे हैं।
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विभिन्न कोर्स अलग-अलग भाषाओं में पढ़ाए जाएंगे
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से डिजिटल यूनिवर्सिटी को लेकर जो ऐलान किया गया है, उसके मुताबिक इसकी स्थापना इन्फरमेशन एंड कम्युनिकेशन टेक्नालॉजी के आधार पर होगी। डिजिटल यूनिवर्सिटी का निर्माण देशभर की शीर्ष केंद्रीय यूनिवर्सिटियों की मदद से किया जाएगा। यह हब एंड स्पोक मॉडल नेटवर्क पर काम करेगी। इस यूनिवर्सिटी की मदद से देश की विभिन्न भाषाओं में छात्रों को शिक्षा दी जा सकेगी। यही नहीं, छात्रों को इंडियन सोसाइटी फॉर टेक्निकल एजुकेशन के मानकों पर वर्ल्ड क्लास एजुकेशन उपलब्ध कराया जाएगा।
सेंट्रल यूनिवर्सिटीज की ली जाएगी मदद
डिजिटल यूनिवर्सिटी के तहत जरूरी डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और ट्रेनिंग उपलब्ध कराया जाएगा और यह काम सेंट्रल यूनिवर्सिटीज की मदद से होगा। इसमें छात्रों को विभिन्न कोर्स और डिग्री से जुड़ी पढ़ाई ऑनलाइन उपलब्ध कराई जाएगी। हालांकि, अभी इसका निर्धारण नहीं किया गया है कि इस यूनिवर्सिटी में किस तरह के कोर्स की पढ़ाई होगी। हालांकि, माना जा रहा है कि इस यूनवर्सिटी में तकनीकी शिक्षा पर अधिक फोकस किया जाएगा।
दूरदराज क्षेत्रों में छात्र एक साथ एक पढ़ाई कर सकेंगे
इस यूनिवर्सिटी के जरिए देशभर में दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों में रह रहे छात्रों को विश्व स्तरीय शिक्षा दी जा सकेगी। छात्रों को एक ही प्लेटफॉर्म पर विभिन्न शीर्ष विश्वविद्यालयों के कोर्स करने का मौका मिलेगा और इस तरह छात्र अपने मनचाहे कोर्स मनमाफिक यूनिवर्सिटी से घर बैठे कर सकेंगे। इसमें एक कैंपस होगा, जहां शिक्षक और स्टाफ होंगे और यही शिक्षक विभिन्न राज्यों में बैठे छात्रों को एक साथ ऑनलाइन पढ़ाएंगे।
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डिस्टेंस लर्निंग में पहले से इस तरह हो रही पढ़ाई
हालांकि, दूरस्थ शिक्षा यानी डिस्टेंस एजुकेशन के तहत पहले भी पढ़ाई हो रही थी, मगर पहले स्टडी मेटेरियल घर पर पोस्ट के जरिए आता था और इसमें काफी समय लगता था। मगर अब स्टडी मेटेरियल के लिए छात्रों को इंतजार करने की जरूरत नहीं होगी। उनकी पढ़ाई से संबंधित मेटेरियल ऑनलाइन तुरंत मिल सकेगा। मणिपाल यूनिवर्सिटी, इग्नू और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालयों के जरिए डिस्टेंस लर्निंग कोर्स कराए जाते हैं।
हब एंड स्पोक मॉडल पर आधारित होगा नेटवर्क
डिजिटल यूनिवर्सिटी हब एंड स्पोक मॉडल पर आधारित होगी। यह ऐसा डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क होता है, जिसमें सब कुछ एक सेंट्रलाइज्ड हब से होता है और अंत में छोटी-छोटी जगहों यानी स्पोक तक पहुंचता है। यानी यह हब से निकलेगी और स्पोक तक पहुंचाई जाएगी। इसके तहत, एक मैसेज पैदा किया जाएगा और उसे एक ही बार में विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफार्म यानी स्पोक पर शेयर किया जाएगा।
केरल में है देश की पहली डिजिटल यूनिवर्सिटी
बहरहाल, यह पहली बार नहीं है जब देश में डिजिटल यूनिवर्सिटी को लेकर चर्चा हो रही है। इससे पहले, वर्ष 2021 में देश की पहली डिजिटल यूनिवर्सिटी केरल में खुल चुकी है। यह दो दशक पुराने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इन्फमरमेशन टेक्नालॉजी एंड मैनेजमेंट केरल (IIITM-K) को अपग्रेड करके ही की गई है। केरल की डिजिटल यूनिवर्सिटी पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम और विभिन्न डिजिटल टेक्नालॉजी के क्षेत्रों में शोध आधारित कोर्स पर पढ़ाई होती है। केरल की यह यूनिवर्सिटी कंप्यूटर साइंस, इन्फरमेटिक्स, एप्लाइड इलेक्ट्रानिक्स एंड ह्यूमिनेटिज के अलावा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, ब्लॉकचेन, साइबर सिक्योरिटी डेटा एनॉलिटिक्स समेत विभिन्न उद्योगों पर आधारित शिक्षा उपलब्ध कराती है।
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जोधपुर में दूसरी डिजिटल यूनिवर्सिटी
वहीं, देश की दूसरी डिजिटल यूनिवर्सिटी राजस्थान के जोधपुर में स्थापित की जा रही है। जोधपुर डिजिटल यूनिवर्सिटी का निर्माण 30 एकड़ क्षेत्र में करीब चार सौ करोड़ की लागत से हो रहा है। इसे ट्विन टॉवर के फ्रेम में बनाया जा रहा है और इसमें खिड़कियों की जगह विंडोज मैट्रिक्स दिखाई पड़ेंगे।
कई देशों में कराए जा रहे डिजिटल यूनिवर्सिटी से कोर्स
भारत के अलावा, दुनियाभर में पहले से डिजिटल यूनिवर्सिटी के तहत छात्रों को ऑनलाइन शिक्षा दी जा रही है। यही नहीं, कई देशों की यूनिवर्सिटिज में विभिन्न कोर्स की पढ़ाई ऑनलाइन तर्ज पर होती है और इनकी डिग्री भी ऑनलाइन दी जाती है। इनमें यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन, एडिनबर्ग यूनिवर्सिटी, जॉन हापकिंस यूनिवर्सिटी शामिल हैं। हालांकि, ये विश्वविद्यालय ऑनलाइन के साथ-साथ ऑफलाइन यानी अपने कैंपस में भी शिक्षा उपलब्ध कराती हैं।
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